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लीबिया और दुबई में बाढ़ः कारण, प्रभाव एवं निहितार्थ

लीबिया को सितंबर 2023 में डेनियल नामक उष्णकटिबंधीय तूफान के कारण बीती एक सदी की सबसे घातक बाढ़ का सामना करना पड़ा। तीव्र पवनों तथा भारी वर्षा के कारण दो बांध टूट गए, जिसके परिणामस्वरूप बाढ़ आई और घर, अस्पताल, राजमार्ग तथा विद्युत परिसंचरण लाइनें तहस-नहस हो गई। इसी प्रकार से, दुबई में अप्रैल 2024 में देश में उस समय तक की सबसे भारी वर्षा दर्ज की गई, जिसके कारण देश में बाढ़ की घटनाएं हुई। हालांकि, लीबिया एवं दुबई में बाढ़ के कारण अलग-अलग थे। इसलिए दोनों मामलों को एक-एक कर समझते हैं।


सरल शब्दों में, बाढ़ जल का अधिप्रवाह है जो सामान्यतः सूखी भूमि को जलमग्न कर देती है, जैसे कि नदी का अपने बाढ़कृत मैदान (किसी नदी का सीमावर्ती क्षेत्र जहां बार-बार बाढ़ आती रहती है।) को जलमग्न कर देना। बाढ़ को उनकी ऊंचाई, अधिकतम विसर्जन (Peak discharge—किसी नदी या जलधारा में प्रवाह की अधिकतम दर), जलमग्न क्षेत्र और प्रवाह की मात्रा से मापा जा सकता है। ये कारक भूमि के विवेकपूर्ण उपयोग, पुल एवं बांध के निर्माण, बाढ़ के पूर्वानुमान और नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण हैं।

किसी जलधारा की विसर्जित मात्रा में महीने-दर-महीने और वर्ष-दर-वर्ष बहुत अंतर हो सकता है। इस परिवर्तनशीलता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण फ्लैश फ्लड (आकस्मिक बाढ़) है, अर्थात किसी नदी में आधिक्य जल का अचानक बहाव, जो प्रायः हानिकारक होता है। यह दुर्लभ, अल्पकालिक घटना सामान्यतया गर्मियों में तड़ित झंझा या पहाड़ों में तेजी से पिघलने वाले हिम एवं तुहिन (snow) के कारण होती है। आकस्मिक बाढ़ एक ही सहायक नदी में आ सकती है जबकि शेष अपवाह द्रोणी (ड्रेनेज बेसिन—किसी नदी और उसकी सभी सहायक नदियों का अपवाहित भौगोलिक क्षेत्र) सूखी रहती है। अचानक घटित होने के कारण आकस्मिक बाढ़ अत्यधिक खतरनाक होती है।


लीबिया में आई बाढ़

लीबिया उत्तरी अफ्रीका क्षेत्र में स्थित है। अफ्रीका का अधिकांश हिस्सा सहारा रेगिस्तान में स्थित है। इसकी अधिकांश आबादी तट और इसके निकटवर्ती पश्चभूमि, जहां लीबिया की राजधानी त्रिपोली और एक अन्य प्रमुख शहर बेंगाजी स्थित हैं, में संकेंद्रित है। लीबिया की सीमा उत्तर में भूमध्य सागर, पूर्व में मिस्र, दक्षिण-पूर्व में सूडान, दक्षिण में नाइजर और चाड, तथा पश्चिम में ट्यूनीशिया और अल्जीरिया से लगती है।

2023 में लीबिया में आई बाढ़ एक विनाशकारी घटना थी जो 10 और 11 सितंबर को पूर्वी लीबिया में आई थी। डेनियल तूफान, एक शक्तिशाली भूमध्यसागरीय चक्रवात, के कारण भारी वर्षा हुई जिससे यह क्षेत्र डूब गया और यहां बाढ़ आ गई, जिसके परिणामस्वरूप हजारों लोग मारे गए तथा लगभग 10,000 लोग लापता हो गए। मूसलाधार वर्षा के विकृत होने से शहर में स्थित दो बांधों में उत्प्रवाह (या जल की अधिकता) होने के कारण वे टूट गए, जिससे जल एवं आपंक (जलीय तंत्र में वायु अथवा जल उपचार प्रक्रिया द्वारा हटाए गए हानिकारक अर्ध-ठोस अवशिष्ट) की एक बड़ी बाढ़ के साथ लीबिया के बंदरगाह शहर डेरना का एक बड़ा हिस्सा नष्ट हो गया।

बाढ़ के कारक: विशेषज्ञों के अनुसार, बाढ़ के तीन प्रमुख कारक हैं—चरम मौसम, सुभेद्य भूगोल तथा जीर्ण अवसंरचना, जिनके कारण उत्तरी अफ्रीका में लगभग एक शताब्दी के बाद सबसे विनाशकारी बाढ़ आई।

1. चरम मौसमः लीबिया के पूर्वी क्षेत्र में 10 से 11 सितंबर तक अत्यधिक वर्षा हुई, जिससे डेरना के पास अल-बायदा में बाढ़ आ गई। शहर में साधारणतया सितंबर में लगभग आधा इंच वर्षा होती है और सालाना औसतन 21.4 इंच वर्षा होती है, लेकिन वर्ल्ड मीटीयोरोलॉजिकल ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएमओ) के अनुसार, 10 और 11 सितंबर, 2023 को 414.1 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो 16 इंच अधिक है। इसी तरह डेरना में, जहां सितंबर में औसत मासिक वर्षा 1.5 मिमी से कम होती है, केवल दो दिनों में 150 मिमी से अधिक वर्षा दर्ज की गई। वर्षा के साथ 80 किमी/घंटा तक की तीव्र पवनें भी चली थीं।

एक और मौसमी घटना डेनियल तूफान है, जिसे साइक्लोन डेनियल के नाम से भी जाना जाता है, जो ग्रीस में बना और इसके कारण तेज हवाओं के साथ मूसलाधार वर्षा हुई, जिससे सितंबर के महीने में स्पेन, तुर्की तथा बुल्गारिया में बाढ़ आई और मौतें हुई। डेनियल तूफान भूमध्य सागर के ऊपर एक उष्णकटिबंधीय चक्रवात जैसे चक्रवात में परिवर्तित हो गया, तथा उष्ण जल के कारण और भी मजबूत हो गया। यह दक्षिण की ओर बढ़ गया और इस कारण पूर्वोत्तर लीबिया में अत्यधिक वर्षा हुई, जहां पर्वतीय क्षेत्र से प्रवाहित होने वाले जल ने बांधों को जलमग्न कर दिया। उस वर्ष भूमध्य सागर पिछले वर्ष की अपेक्षा 2 से 3 डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म था।

2. सुभेद्य भूगोलः शहर की व्यापक क्षति का कारण घाटी के अंत में इसकी अवस्थिति तथा वाडी डेरना, एक मौसमी नदी जो पहाड़ों से दक्षिण की ओर (समुद्र की ओर) बहती है और सामान्यतया बांधों के कारण बाढ़ से सुरक्षित रहती है, से इसकी निकटता भी थी। हालांकि, डेनियल तूफान ने रात में तट को जीर्ण-शीर्ण कर दिया और शहर में प्रवेश कर गया, जिससे वाडी डेरना में आकस्मिक बाढ़ आ गई।

3. जीर्ण अवसंरचनाः डेरना में दो बांधों के अचानक ढह जाने से लीबिया की अवसंरचना की बदतर हालत का पता चलता है। यह देश एक दशक से भी अधिक समय से दो विरोधी गुटों के बीच चल रहे संघर्ष से जूझ रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लीबिया की मान्यता प्राप्त सरकार का नेतृत्व त्रिपोली में प्रधानमंत्री अब्दुल हामिद दबीबा कर रहे हैं। जबकि, बेंगाजी में, प्रतिद्वंद्वी प्रधानमंत्री ओसामा हमद पूर्वी प्रशासन का नेतृत्व करते हैं, जिन्हें शक्तिशाली सैन्य कमांडर खलीफा हिफ्तार का समर्थन प्राप्त है। सत्ता की होड़ में, अवसंरचना की देखरेख या मरम्मत करने और विकसित करने जैसे सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर ध्यान देने के बदले उनकी अनदेखी की गई है।

इसके अलावा, चूंकि लीबिया क्षेत्र में बाढ़ आना एक दुर्लभ घटना है, इसलिए देश आपदा के लिए पर्याप्त रूप से तैयार नहीं था। देश में, विशेषकर डेरना में, बाढ़-रोधक संरचनाओं एवं सड़कों का अभाव है। साथ ही, ऐसी आपदाओं के लिए कोई पूर्व-चेतावनी प्रणाली भी नहीं है।

दुबई में आई बाढ़

दुबई, जहां अप्रैल 2024 में बाढ़ की घटनाएं हुई, संयुक्त अरब अमीरात के सबसे संपन्न अमीरातों (अमीरों की रियासत) में से एक है। यह पर्वतीय मुसंदम प्रायद्वीप के तल पर स्थित एक बंदरगाह शहर है।

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), जिसे एमीरेट के नाम से भी जाना जाता है, मध्य पूर्व में पश्चिम एशिया में अरब प्रायद्वीप के पूर्वी तट पर स्थित सात अमीरातों का एक संघ है। यह ओमान एवं सऊदी अरब के साथ भू-सीमाएं तथा कतर और ईरान के साथ फारस की खाड़ी में समुद्री सीमाएं साझा करता है।

संयुक्त अरब अमीरात में भारी वर्षा हुई, जिसके परिणामस्वरूप 16 अप्रैल, 2024 को दुबई और उसके हवाई अड्डे में बाढ़ आ गई। देश में प्रति वर्ष औसतन 140-200 मिमी वर्षा, जबकि दुबई में सामान्यतया केवल 97 मिमी वर्षा होती है। अप्रैल के लिए इसका मासिक औसत केवल 8 मिमी है। दुबई से 130 किमी दूर स्थित अल ऐन (Al Ain) शहर में 254 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो 1949 के बाद से 24 घंटे की अवधि में सबसे अधिक थी।

कारणः इस भारी वर्षा का प्रमुख कारण एक तूफान तंत्र था, जो अरब प्रायद्वीप से गुजर रहा था और ओमान की खाड़ी में आगे बढ़ रहा था। हालांकि, क्लाउड सीडिंग (मेघ बीजन), जलवायु परिवर्तन और एल नीनो सहित जलप्रलय के कारणों की धीरे-धीरे पहचान की जा रही है। आइए इनमें से प्रत्येक कारण पर चर्चा करें और जानें कि वास्तव में ऐसी विनाशकारी घटना के लिए कौन जिम्मेदार है।

क्लाउड सीडिंग  एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें सिल्वर आयोडाइड जैसे रसायनों को बादलों में अंतःक्षेपित किया जाता है ताकि ऐसे वातावरण में वर्षा को बढ़ावा दिया जा सके जहां पानी की कमी चिंता का विषय है। यूएई, जहां औसत वार्षिक वर्षा बहुत कम होती है और गर्मियों में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, में वर्षण (Precipitation—वायुमंडलीय जलवाष्प, जो संघनित होकर वर्षा, सहिम वृष्टि, [Sleet], ओले तथा बर्फ के रूप में पृथ्वी पर गिरता है।) में वृद्धि हेतु वर्षों से अकसर क्लाउड सीडिंग की जाती है। तथापि, यूएई की मौसम विज्ञान एजेंसी ने बताया कि अप्रैल में आए तूफान से पहले ऐसी कोई संक्रिया नहीं की गई थी, और यह भी कहा कि क्लाउड सीडिंग को भारी वर्षा के प्राथमिक कारक के रूप में मानना भ्रामक था जैसा कि क्लाउड सीडिंग से बादल नहीं बन सकते। यह पहले से ही आसमान में मौजूद जल को संघनित करने और कुछ जगहों पर वर्षा करने के लिए प्रेरित करता है। इसलिए, क्लाउड सीडिंग के लिए सबसे पहले नमी की आवश्यकता होती है; इसके बिना, बादल नहीं होंगे।

जलवायु परिवर्तन और अन्य कारक, जिनके कारण भारी वर्षा हुई, सामान्य मौसम तंत्र को और भी बिगाड़ सकते हैं। सतह पर निम्न दाब के साथ मिलकर, ऊपरी वायुमंडल में एक निम्न दाब तंत्र ने हवा के दबाव को ‘दबाने’ की भांति कार्य किया। उस दाब से शक्तिशाली तड़ित झंझा शुरू हुई, जो भूमि तल के उष्ण तापमान और उच्च तापमान के बीच के व्यतिरेक के कारण और भी तीव्र हो गई। अध्ययनों से संकेत मिलता है कि औसत तापमान में 1 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि से वायुमंडल की लगभग 7 प्रतिशत अधिक नमी धारण करने की क्षमता बढ़ सकती है। 1850 के बाद से, पृथ्वी का वैश्विक औसत तापमान कम से कम 1.1 डिग्री सेल्सियस बढ़ा है, जबकि यूएई ने पिछले 60 वर्षों में लगभग 1.5 डिग्री सेल्सियस की तापमान वृद्धि का अनुभव किया है। यह तूफानों को और अधिक खतरनाक बनाता है जैसा कि इससे वर्षण की तीव्रता, अवधि और आवृत्ति में वृद्धि होती है, जो अंततः गंभीर बाढ़ का कारण बन सकती है। जलवायु वैज्ञानिकों द्वारा गठित, वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन ग्रुप ने जीवाश्म ईंधन के दहन से होने वाले ऊष्मण को वर्षा में वृद्धि के लिए सबसे संभावित कारक बताया है, हालांकि इस परिवर्तन की सीमा की सटीक व्याख्या अभी तक उपलब्ध नहीं है।

इसलिए, किसी विशेष चरम मौसम की घटना को जलवायु परिवर्तन के लिए उत्तरदायी ठहराना बहुत कठिन है। प्राकृतिक जलवायु परिवर्तनशीलता के प्रतिरूपों, जैसे कि एल नीनो और ला नीना, जैसे कई कारक ऐसी घटनाओं में योगदान देते हैं। भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्रों में एल नीनो घटित होने के वर्षों के दौरान सबसे तीव्र वर्षा होती है, जैसे कि 2023-24 में हुई थी, और यदि एक या दो दिनों में ही पूरे वर्ष में होने वाली सामान्य वर्षा से दोगुनी वर्षा होती है, तो यह निस्संदेह बाढ़ आने का एक प्रमुख कारक है, विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों और शुष्क एवं अर्ध-शुष्क पारिस्थितिकी तंत्रों में, जहां मृदा और विरल पौधे सीमित अंतःस्यंदन (वह प्रक्रिया जिसमें जल मृदा-पृष्ठ से होकर नीचे की ओर प्रवेश करता है) और वाष्पोत्सर्जन की क्षमता रखते हैं।

बाढ़ का प्रभाव

लीबिया और दुबई में आई बाढ़ का देश में रहने और काम करने वाले लोगों पर विनाशकारी प्रभाव पड़ा था। लीबिया में भारी तबाही हुई, पूरे क्षेत्र बाढ़ में बह गए या डूब गए, जिससे देश के पूर्वी हिस्से में हजारों लोग मारे गए। केवल भूमध्यसागरीय बंदरगाह शहर डेरना, जहां दो बांध ध्वस्त हो गए जिससे अवसंरचना को बहुत नुकसान पहुंचा, में हजारों लोग विस्थापित और हजारों लापता हो गए। उपग्रह से ली गई तस्वीरों से पता चला कि पूर्ववर्ती स्थापित क्षेत्र, जैसे खेत, कृषिभूमि, स्कूल, उपनगरीय सड़कें और कब्रिस्तान, नष्ट हो गए थे या पंक से आच्छादित हो गए।

इसी तरह, दुबई के हवाई अड्डे (विश्व का दूसरा सबसे व्यस्त हवाई अड्डा) से आने-जाने वाली 1,000 से अधिक निर्धारित उड़ानें रद्द कर दी गई, जिसके कारण कई दिनों तक देरी हुई। बाढ़ के कारण लोगों को अपने जलमग्न वाहन सड़कों पर छोड़ देने पड़े। कुछ मोटर चालक सड़कों के अवरुद्ध होने के कारण घर वापस नहीं जा पाए और उन्हें अपनी कारों में ही सोना पड़ा। शहर के आलीशान मॉल्स में छत से वर्षा का पानी रिसने के कारण रिसाव हुआ, जबकि गगनचुंबी इमारतों में लिफ्ट के खराब होने के कारण निवासियों को सीढ़ियों द्वारा दर्जनों मंजिलें चढ़नी पड़ीं।

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