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जापान, ताइवान, मोरक्को और अफगानिस्तान में भूकंप—कारण एवं प्रभाव

भूकंप धरातल/भू-पृष्ठ में होने वाला कंपन है जो स्थलमंडल में ऊर्जा के अकस्मात निर्मुक्त होने के कारण होता है, जिससे भूकंपी तरंगें उत्पन्न होती हैं। इसे क्वेक (भूकंप), ट्रेमर (कंप) या टेम्बलर (भूकंप) भी कहा जाता है। भूकंप को उनकी तीव्रता के अनुसार वर्गीकृत किया जा सकता है, जो हल्के से लेकर प्रचंड तक हो सकते हैं, जिससे अवसंरचना और जीवन को अत्यधिक क्षति पहुंचती है।

भूकंप, टेक्टोनिक प्लेट्स (पट्टिका-विवर्तनिकी) के संचलन या गति के कारण प्राकृतिक रूप से या मानव-प्रेरित, जैसे कि खनन, फ्रैकिंग (जमीन की सतह के नीचे शेल चट्टानों [Shale—मृदा की क्रमिक परतों के निक्षेपण से निर्मित एक अवसादी शैल] में बड़ी दरारें बनाकर उसमें से तेल या गैस निष्कर्षण की एक विधि।) और परमाणु परीक्षणों के कारण हो सकते हैं। संविदारण (Rupture—किसी भाग का बलपूर्वक विदरण [tearing] करना) के शुरुआती बिंदु को अवकेंद्र (हाइपोसेंटर) या उद्गम केंद्र (फोकस) कहा जाता है, जबकि इसके ठीक ऊपर का भू-तल अधिकेंद्र या उपरिकेंद्र (एपिसेंटर) होता है।

भूकंप के मामले दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। 3 अप्रैल, 2024 को ताइवान में 7.2 तीव्रता (मैग्निट्यूड) का भूकंप आया, जिसके परिणामस्वरूप कम से कम नौ लोगों की मृत्यु हो गई और लगभग 800 लोग घायल हो गए। जैपनीज मीटीयोरोलॉजिकल एजेंसी (जेएमए) ने 01 जनवरी, 2024 को जापान के होन्शू में नोटो प्रायद्वीप के उत्तरी तट के निकट 7.6 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया। 7 अक्टूबर, 2023 को पश्चिमी अफगानिस्तान में 6.3 तीव्रता का भूकंप आया, जिसके अगले महीने में देश के हेरात प्रांत में कई भूकंप आए, जिनमें दो हजार से अधिक लोगों की मृत्यु हो गई। 8 सितंबर, 2023 को मोरक्को में 6.8 तीव्रता का भूकंप आया, जो देश में अब तक का सर्वाधिक तीव्रता वाला भूकंप था।


विश्व भर में एक दिन में कई सौ बार औसतन, 2 की तीव्रता वाले और उससे छोटे भूकंप आते हैं। 7 की तीव्रता से अधिक तीव्रता वाले बड़े भूकंप महीने में एक से अधिक बार आते हैं, जबकि 8 की तीव्रता और उससे अधिक तीव्रता वाले बड़े भूकंप वर्ष में एक बार आते हैं। औसतन, प्रति वर्ष 7 या उससे अधिक तीव्रता वाले पंद्रह भूकंप आते हैं।


भूकंपों का मापन

भूकंपों का मापन रिक्टर पैमाने पर किया जाता है, जिसे 1935 में चार्ल्स फ्रांसिस रिक्टर ने तैयार किया था। यह एक लघुगणकीय पैमाना है, जहां प्रत्येक चरण परिमाण में दस गुना वृद्धि को दर्शाता है। हालांकि, रिक्टर पैमाना साधारणतया क्षेत्रीय भूकंपों, जो 5 से अधिक तीव्रता के नहीं होते, के लिए प्रभावी होता है।

इसलिए, वैज्ञानिकों ने एक बहुत अधिक संवेदनशील सीस्मोमीटर (भूकंपमापी) विकसित किया है, जिसे मोमेंट मैग्निट्यूड स्केल (MW) कहा जाता है, जो बड़े भूकंपों के मापन हेतु अधिक प्रभावी है, जैसा कि यह निर्मुक्त ऊर्जा की गणना करने के लिए अधिक चरों का उपयोग करता है। भूकंपी समय यह दर्शाता है कि भूकंप के दौरान क्या होता है, और यह निर्धारित करता है कि दर्ज की गई तरंगों को उत्पन्न करने के लिए कितने बल की आवश्यकता होती है। भूकंप की विशेषता/लक्षण का बोध कराने वाली संख्या भ्रंश-रेखा (फॉल्ट लाइन) द्वारा किए गए स्थानांतरण की दूरी और उस स्थानांतरण के लिए प्रयुक्त बल के संयोजन को निरूपित करती है।

सामान्यतया, 2.5 या उससे कम तीव्रता वाले भूकंपों का पता नहीं चलता; हालांकि, उपकरणों द्वारा इनका पता लगाया जा सकता है। 5 तक की तीव्रता वाले भूकंप महसूस किए जाते हैं और इनसे मामूली क्षतियां हो सकती हैं।

आइए इन भूकंपों पर एक-एक कर विचार करें।

ताइवान के भूकंप

ताइवान पश्चिमी प्रशांत महासागर में एक द्वीप राष्ट्र (एक देश जो पूरी तरह से एक या अधिक द्वीपों से बना हो) है, जो दक्षिण-पूर्वी चीन के तट से लगभग 100 मील की दूरी पर स्थित है। ज्वालामुखी पर्वतमाला (रिंग ऑफ फायर), जहां विश्व के अधिकांश भूकंप आते हैं, के किनारे स्थित होने के कारण ताइवान भूकंप के प्रति संवेदनशील है। इसलिए, इस द्वीप पर शक्तिशाली भूकंपों का आना कोई नई बात नहीं है। तथापि, ताइवान की उन्नत तकनीक और आपदा प्रतिक्रिया ने मृतकों की संख्या को काफी कम कर दिया है। यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (यूएसजीएस) के अनुसार, 1980 से ताइवान और उसके निकटवर्ती जलक्षेत्र में 4.0 या उससे अधिक की तीव्रता वाले लगभग 2,000 भूकंप आए हैं। ताइवान में 1999 के भूकंप ने अधिकारियों को अपनी आपातकालीन प्रतिक्रिया और आपदा न्यूनीकरण प्रयासों को बढ़ाने के लिए सक्रिय किया। मध्य ताइवान में आए 7.6 की तीव्रता के भूकंप के कारण लगभग 2,500 लोगों की मृत्यु हो गई और लगभग 10,000 घायल हो गए। इसके अलावा, लगभग 50,000 इमारतें ध्वस्त या क्षतिग्रस्त हो गई। फलस्वरूप, ताइवान की सरकार ने आपदा निवारण एवं संरक्षण अधिनियम (Disaster Prevention and Protection Act) को लागू किया और भूकंप समन्वयन एवं प्रशिक्षण के लिए दो राष्ट्रीय केंद्रों की स्थापना की, जिसके परिणामस्वरूप यहां विश्व के सबसे उन्नत भूकंप तत्परता केंद्रों में से एक तैयार हुआ।


प्रशांत महासागर के चारों ओर घोड़े की नाल के आकार का लंबा घेरा है जिसकी लंबाई लगभग 40,000 किमी है और विशिष्ट रूप से भूकंप संभावित क्षेत्र है। बारंबार आने वाले भूकंप फिलीपीन सी प्लेट और यूरेशियन प्लेट के बीच होने वाली परस्पर अन्योन्यक्रिया, जिसके परिणामस्वरूप भूकंप के रूप में अचानक ऊर्जा निर्मुक्त होती है, से संचित दबाव के कारण आते हैं।


जापान के भूकंप

1 जनवरी, 2024 को यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे के नेशनल अर्थक्वेक इन्फर्मेशन सेंटर (यूएसजीएस) ने जापान के होन्शू में 7.5 की तीव्रता का भूकंप दर्ज किया; जबकि, जेएमए ने इसे 7.6 की तीव्रता का भूकंप दर्ज किया। यूएसजीएस की रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न एजेंसियों के मापन में अलग-अलग सेंसर और पद्धतियों के कारण अंतर हो सकते हैं। दर्जनों उत्तरघात (Aftershock—वह भूकंप जो बड़ी तीव्रता वाले भूकंप, जिसे “मुख्य घात” [Main Shock] कहा जाता है, के बाद आता है और यह मुख्य घात के संविदारण क्षेत्र में या उसके आसपास उत्पन्न होता है।) भी दर्ज किए गए। भूकंप के कारण नैनाओ में भू-पृष्ठ उल्लेखनीय ढंग से हिल गया, जबकि टोक्यो में हल्के झटके महसूस किए गए। इस भूकंप के कारण जापान में लगभग तीन फीट ऊंची सुनामी भी आई। जेएमए ने शुरू में एक बड़ी सुनामी की चेतावनी जारी की थी, जो जापान के 2011 के भूकंप और सुनामी के बाद जारी की गई पहली बड़ी चेतावनी थी, लेकिन बाद में उसने इसे एक सलाह तक सीमित कर दिया। नोटो प्रायद्वीप पर शिका परमाणु ऊर्जा संयंत्र के दो रिएक्टर बच गए, लेकिन क्षति के कारण अस्थायी रूप से विद्युत व्यवस्था बंद हो गई थी। इशिकावा प्रांत का एक शहर वाजिमा, भूकंप से सबसे गंभीर रूप से प्रभावित क्षेत्रों में से एक था। सरकारी अनुमान के अनुसार, भूकंप से हुआ संभावित नुकसान 7.4-17.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर के बीच था। जापानी रेड क्रॉस की रिपोर्ट के अनुसार, 60,614 से अधिक घर क्षतिग्रस्त हुए थे। यह भूकंप अन्य भूकंपों से अलग था, जैसा कि यह अंतःग्रसन (सबडक्शन) के कारण नहीं हुआ, बल्कि यह ‘अर्थक्वेक स्वार्म’ का हिस्सा था।


अर्थक्वेक स्वार्म किसी स्थानीय क्षेत्र में अल्प अवधि के भीतर होने वाली भूकंपीय घटनाओं की एक शृंखला है। स्वार्म (समूह) का वर्णन करने के लिए प्रयुक्त समय सीमा दिन, महीने या वर्ष हो सकती है। इस दौरान निर्मुक्त ऊर्जा सामान्य भूकंपों की तुलना में अलग होती है जहां एक बड़े भूकंप (मुख्य घात) के बाद उत्तरघात की एक शृंखला आती हैं। अर्थक्वेक स्वार्म के मामले में, कोई विशिष्ट मुख्य घात नहीं होता है। दूसरे शब्दों में, अर्थक्वेक स्वार्म मध्यम झटके वाले भूकंपों के समूह होते हैं जो बिना किसी सुस्पष्ट मुख्य घात के घंटों से लेकर दिनों तक की अवधि में आते हैं।


अफगानिस्तान के भूकंप

अक्टूबर 2023 में अफगानिस्तान के हेरात के पास तीन शक्तिशाली भूकंप आए। 7 अक्टूबर को पश्चिमी अफगानिस्तान में 6.3 की तीव्रता वाला भूकंप आया, जिसका अधिकेंद्र हेरात से 40 किमी उत्तर-पश्चिम में जिंदा जान नामक जिले में स्थित था। दूसरा भूकंप 11 अक्टूबर को भूकंप के उक्त अधिकेंद्र से 14 किमी दूर दक्षिण-पूर्व में आया, जबकि तीसरा भूकंप 15 अक्टूबर को आया।

जिंदा जान जिले के ग्यारह गांवों में लगभग 2,445 लोग मारे गए और 9,420 से अधिक घायल हुए थे।

यह भूकंप हरि रूड फॉल्ट सिस्टम (एक प्रमुख महाद्वीपीय सीमा की संधि [Suture] है जो उत्तर में अपेक्षाकृत स्थिर व हल्के रूप से विकृत यूरेशियाई [लॉरेशिया] महाद्वीप और दक्षिण में व्यापक रूप से विकृत व संचित भूभाग के बीच की सीमा से संपाती है) में संविदारण या दरार के कारण आया। हरि रूड फॉल्ट सिस्टम अफगानिस्तान में एक प्रमुख विवर्तनिक भ्रंश (Tectonic fault—भू-पृष्ठ पर तथा इसके गतिशील आंतरिक भाग दोनों में स्थानीकृत गति के स्थल) है, जिसकी विशेषता राइट-लेटरल स्ट्राइक-स्लिप सिस्टम है, जिसका अर्थ है कि भ्रंश के दोनों भाग विपरीत दिशाओं में क्षैतिज रूप से एक-दूसरे के पास से गमन करते हैं। उत्तर-पश्चिमी भाग एक राइट-लेटरल स्ट्राइक-स्लिप फॉल्ट (एक भ्रंश जिसके पार भूगर्भिक विशेषताएं इस प्रकार विस्थापित हो जाती हैं कि भ्रंश के पार देखने पर दूर वाला भाग दाईं ओर विस्थापित हो जाता है।) है, जबकि पश्चिमी भाग एक क्षेप भ्रंश (Thrust-fault—भू-पर्पटी में एक दरार, जिसके द्वारा पुरानी चट्टानें तरुण चट्टानों के ऊपर धकेल दी जाती हैं।) है। अनुमानित क्षेप भ्रंशन, हरि रूड फॉल्ट सिस्टम में बाएं चरण पर हुआ। क्षेप भ्रंशन एक प्रकार का भ्रंशन है, जिसमें दो विवर्तनिक पट्टिका टकराती हैं, जिससे एक पट्टिका दूसरे के ऊपर खिसक जाती है, इससे बड़े भूकंप आते हैं, विशिष्ट रूप से ऐसा तब होता है जब इनका अपनी पूरी लंबाई में संविदारण हो जाता है।

इससे पहले, अफगानिस्तान में पिछले कुछ वर्षों में कई और भूकंप आए। उदाहरण के लिए, मार्च 2023 में, बदख्शां में 6.5 तीव्रता का भूकंप आया, जिसमें अफगानिस्तान और पाकिस्तान में कम से कम 13 लोगों की मृत्यु हुई। सितंबर 2022 में, कुनार प्रांत में भूकंप आया, जिसमें 8 लोगों की मृत्यु हुई। जून 2022 में, पक्तिका में 6.1 तीव्रता वाले भूकंप ने 1,036 लोगों की जान ले ली, जिससे व्यापक क्षति हुई और अफगानिस्तान को अंतरराष्ट्रीय सहायता के लिए अपील करने पर मजबूर होना पड़ा। 2015 में, अफगानिस्तान के इतिहास में दर्ज सबसे बड़े भूकंपों में से एक, 7.5 तीव्रता वाले भूकंप के कारण अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत में 399 लोगों की मृत्यु हुई। 2002 में हिंदू कुश के भूकंप में 1,100 लोग मारे गए, जबकि अफगानिस्तान और ईरान की सीमा पर कयेन में 1997 में आए भूकंप में 1,500 से अधिक लोग मारे गए और 10,000 से अधिक आवास नष्ट हो गए। सुदूर पूर्वोत्तर प्रांत ताखर में 1998 में आए भूकंप में कम से कम 2,300 लोग मारे गए थे, जबकि अनुमानित रूप से यह संख्या 4,000 तक थी।

देश में बार-बार भूकंप आने का कारण इसकी भौगोलिक अवस्थिति है। अफगानिस्तान, ऐसी भ्रंश-रेखाओं पर स्थित है जहां भारतीय एवं यूरेशियाई विवर्तनिक पट्टिकाएं मिलती हैं। अफगानिस्तान में अकसर पट्टिकाओं के बीच टकराव होते हैं, जिससे महत्वपूर्ण विवर्तनिक गतिविधि होती है। अफगानिस्तान यूरेशियन प्लेट पर स्थित है। पश्चिमी अफगानिस्तान में, अरब की पट्टिका यूरेशिया के नीचे उत्तर की ओर अंतःग्रसित होती है, जबकि पूर्वी अफगानिस्तान की ओर भारतीय पट्टिका इसी की भांति अंतःग्रसित होती है। दक्षिणी अफगानिस्तान में अरब और भारतीय पट्टिकाएं निकटवर्ती हैं और यूरेशियन प्लेट के नीचे उत्तर की ओर अंतःग्रसित होती हैं।

इस प्रकार, अफगानिस्तान चमन फॉल्ट (यह एक लेफ्ट-लेटरल स्ट्राइक-स्लिप फॉल्ट [एक भ्रंश जिसके पार भूगर्भीय विशेषताएं इस तरह से विस्थापित होती हैं कि भ्रंश के पार देखने पर दूर वाला भाग बाईं ओर विस्थापित हो जाता है।] सिस्टम है, जो दक्षिण-पूर्वी अफगानिस्तान और समीपवर्ती पाकिस्तान में भारतीय और यूरेशियाई पट्टिकाओं के बीच होने वाली विभिन्न गतिविधियों को समायोजित करती है।) और मेन पामीर थ्रस्ट जैसे विभिन्न सक्रिय भ्रंश समूहों से घिरा हुआ है।

हिंदू कुश पर्वत शृंखला और पामीर नॉट (नोडल पर्वतीय उत्थान पर केंद्रित पामीर पर्वत क्षेत्र) भूगर्भीय रूप से जटिल क्षेत्र हैं जहां विवर्तनिक पट्टिकाएं एक-दूसरे का प्रतिच्छेदन (काटती) करती हैं। भारतीय और यूरेशियाई पट्टिकाओं के टकराव और अभिसरण से भू-पर्पटी में वलन और भ्रंशन होता है जिससे इस क्षेत्र में भूकंप आता है।

भारतीय पट्टिकाओं के उत्तर की ओर यूरेशियाई पट्टिका की तरफ बढ़ते रहने से संपीडन उत्पन्न होता है, जो हिमालय के उत्थान और अफगानिस्तान सहित पूरे क्षेत्र में विवर्तनिक दबाव को संचारित करने का कारण है। संपीड़न के कारण पर्पटी विकृत हो जाती है, जिससे भ्रंश और विभंजन होते हैं जो खिसक सकते हैं और भूकंप की उत्पत्ति का कारण बन सकते हैं।

मोरक्को के भूकंप

यूएसजीएस ने 8 सितंबर, 2023 को ऐतिहासिक शहर मारकेश के एटलस पर्वत पर 6.8 की तीव्रता के भूकंप की सूचना दी जिसका अधिकेंद्र अल-हौज प्रांत में था। यूएसजीएस ने बताया कि भूकंप का अधिकेंद्र धरातल से 18.5 किमी नीचे था, जबकि मोरक्को की एजेंसी ने इसकी गहराई 11 किमी बताई, जो इसे हर सूरत में अगभीर भूकंप (जो पृथ्वी की बाहरी सतह से 60 किमी [40 मील] के भीतर उत्पन्न होते हैं) बताता है। अगभीर भूकंप अधिक खतरनाक होते हैं क्योंकि इनमें सतह की बहुत गहराई में आने वाले भूकंप की अपेक्षा सतह पर उभरने के दौरान अधिक ऊर्जा होती है। बहुत गहराई में आने वाले भूकंप का प्रसार सतह पर आने वाले भूकंप की तुलना में दूर तक होता है क्योंकि जैसे-जैसे भूकंपीय तरंगें ऊपर सतह की ओर ऊर्ध्वमुखी होती हैं, वे अधिक दूरी तय करने के कारण कमजोर हो जाती हैं। एक भूकंप की गहराई के साथ-साथ तीव्रता भी एक संकेतक है कि भूकंप कितना विनाशकारी हो सकता है। उदाहरण के लिए, 6 से अधिक तीव्रता वाले भूकंप से उत्पन्न भूकंपीय तरंगों की तीव्रता 5 से अधिक तीव्रता वाले भूकंप से 10 गुना अधिक होती है, तथा प्रत्येक 1 मैग्निटयूड में परिवर्तन करने के लिए ऊर्जा में 32 गुना अधिक का अंतर होता है।

2023 में, मोरक्को में आया भूकंप अफ्रीकी और यूरेशियाई पट्टिकाओं, जो प्रतिवर्ष 4.9 मिमी की दर से अभिसरित हो रही हैं, के खिसकने के कारण आया था। यह भूकंप अजोरेस-जिब्राल्टर ट्रांसफॉर्म फॉल्ट (Azores-Gibraltar Transform Fault (एजीएफजेड)—अजोरेस और जिब्राल्टर जलडमरूमध्य के बीच पूर्वी अटलांटिक महासागर में एक प्रमुख भूकंपीय क्षेत्र है।) के पास उत्पन्न हुआ, जो दो पट्टिकाओं के बीच की सीमा को चिह्नित करने वाली एक प्रमुख भ्रंश-रेखा है। यह भूकंप एक भूगर्भीय घटना के कारण आया था जिसे ‘उत्क्रम भ्रंश’ (रिवर्स फॉल्ट) के रूप में जाना जाता है। ‘उत्क्रम’ शब्द एक ऐसी स्थिति को संदर्भित करता है, जहां भ्रंश-तल के ऊपर का ऊपरी खंड ऊपर की ओर बढ़ता है और निचले खंड के ऊपर चला जाता है। इस प्रकार का भ्रंशन संपीड़न के क्षेत्रों में होना सामान्य है, जहां एक विवर्तनिक पट्टिका दूसरी में अभिसरित हो रही हो। ऐसा तब होता है जब विवर्तनिक पट्टिका टकराती हैं, जिससे पृथ्वी की पर्पटी स्थूल हो जाती है। इन भ्रंश-रेखाओं के पास दबाव भूकंप का कारण बन सकता है जब चट्टानें संचित दबाव को कम करने के लिए आकस्मिक रूप से उठती हैं। इस क्षेत्र में पहले कभी बड़े भूकंप का अनुभव नहीं किया गया, जो दर्शाता है कि पट्टिकाओं के टकराने से काफी समय से भूमिगत दबाव संचित होता रहा है। जब भ्रंश के लिए उस दबाव से भारमुक्त होना बहुत कठिन हो जाता है, तो यह भूकंप का कारण बनता है।

जैसा कि उत्तरी अफ्रीकी क्षेत्र में भूकंप का आना दुर्लभ घटना है इसलिए मोरक्को ऐसी आपदा के लिए पर्याप्त रूप से तैयार नहीं था। मोरक्को में 1960 में आए भूकंप, जिसे अगादिर भूकंप के नाम से जाना जाता है, के कारण विनिर्माण नियमों में बदलाव किए गए, परंतु मोरक्को की अधिकतर इमारतों, विशेषकर ग्रामीण एवं पुराने शहरों में, को तेज झटकों को झेलने लायक नहीं बनाया गया है। इसलिए, पुराने शहर माराकेच में कई घर ध्वस्त हो गए।


विश्व के अन्य प्रमुख भूकंप

1960 में, चिली में अब तक का सबसे बड़ा 9.5 की तीव्रता वाला भूकंप दर्ज किया गया है। व्यापक रूप से यह एकमात्र सत्य है कि भूकंप की तीव्रता मृत्यु और विनाश के अनुरूप होती है। 1960 का भूकंप संभवतः धरती पर उत्पन्न होने वाले भूकंप की अधिकतम सीमा के करीब था क्योंकि इससे बड़े भूकंप की संभावना कम है। चिली में विनाशकारी भूकंपों (9 से अधिक) का एक लंबा इतिहास रहा है, और इसे भूकंप की तैयारियों के लिए एक मॉडल माना जाता है।

1993 में, महाराष्ट्र के लातूर और उस्मानाबाद में 6.2 तीव्रता का भूकंप आया जिसमें लगभग 10,000 लोग मारे गए और 30,000 से अधिक घायल हुए। इस भूकंप को स्थिर महाद्वीपीय पर्पटी (क्रस्ट) में अब तक का सबसे घातक भूकंप माना जाता है।

26 जनवरी, 2001 को गुजरात के भुज में आए भूकंप की तीव्रता 6.9 थी, जिसमें 20,000 से अधिक लोग मारे गए थे। इस भूकंप के झटके उत्तर-पश्चिमी भारत के अधिकांश हिस्सों और पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में महसूस किए गए थे।

दिसंबर 2004 में इंडोनेशिया के तट पर 9.1 तीव्रता का भूकंप आया, जिसके कारण सुनामी आई थी, जो हिंद महासागर के निकटवर्ती क्षेत्र के सभी समुदायों को बहाकर ले गई।

2011 में जापान के तट पर 9 तीव्रता का भूकंप आया था, जिससे जमीन पर व्यापक क्षति हुई थी और सुनामी आई थी। इससे तट के किनारे फुकुशिमा परमाणु संयंत्र में एक बड़ी दुर्घटना भी हुई थी।

25 अप्रैल, 2015 को नेपाल में काठमांडू के पास 7.8 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें 9,000 से अधिक लोग मारे गए थे और कई प्रसिद्ध संरचनाएं जैसे कि दरबार स्कवेयर और धरोहर टॉवर नष्ट हो गई थीं। हालांकि, प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर को कुछ नहीं हुआ।


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