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ब्लू फ्लैग प्रमाणन

26 अक्टूबर, 2022 को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने यह घोषणा की कि दो नए समुद्री तटों—लक्षद्वीप में स्थित मिनिकॉय थुंडी और कदमत तट को ‘ब्लू फ्लैग’ (अंतरराष्ट्रीय ईको-लेबल) प्रमाणन प्रदान किया गया है। इससे पहले भारत के 10 समुद्र तटों—शिवराजपुर (गुजरात), घोघला (दीव), कासरकोड एवं पदुबिद्री (कर्नाटक), कप्पड (केरल), रुशिकोंडा (आंध्र प्रदेश), गोल्डन बीच (ओडिशा), राधानगर (अंडमान एवं निकोबार), कोवलम (तमिलनाडु) और ईडन (पुडुचेरी) को ब्लू फ्लैग प्रमाणन दिया गया था।

ब्लू फ्लैग कार्यक्रम का उद्देश्य समुद्र तटों पर स्थित स्थलों का संवहनीय प्रबंधन, उत्तरदायी पर्यटन को बढ़ावा देना और तटवर्ती क्षेत्रों एवं समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण करना है।

ब्लू फ्लैग प्रमाणन क्या है

ब्लू फ्लैग, समुद्री तटों, बंदरगाहों या किसी संवहनीय नौकायन पर्यटन परिचालक को निर्धारित मानदंडों का पूर्ण रूप से पालन करने पर प्रदान किया जाने वाला एक विश्व प्रसिद्ध प्रमाणन है, जो पारिस्थितिकी लेबल (सूचक) के रूप में कार्य करता है। इस प्रमाणन कार्यक्रम का संचालन डेनमार्क के कोपेनहेगन में स्थित अंतरराष्ट्रीय स्वयंसेवी संस्था, फाउंडेशन फॉर एनवायरनमेंटल एजुकेशन (एफईई) द्वारा किया जाता है, जो पर्यावरण, शैक्षिक, सुरक्षा-संबंधी तथा अभिगम-संबंधी कठोर मानदंड निर्धारित करती है, जिन्हें आवेदकों को पूरा करना और बनाए रखना होता है। यह प्रमाणन एक अंतरराष्ट्रीय जूरी, जिसमें संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी), संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन (यूएनडब्ल्यूटीओ), फाउंडेशन फॉर एनवायरनमेंटल एजुकेशन(एफईई) और अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) शामिल हैं, की अनुशंसाओं के आधार पर एफईई से संबद्ध सदस्य देशों को प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है।


ब्लू फ्लैग कार्यक्रम की शुरुआत 1985 में फ्रांस में की गई थी, जिसे 1987 में पूरे यूरोप में मान्यता मिली। हालांकि, 2001 में इस कार्यक्रम में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने पर यूरोपियन ब्लू फ्लैग, अंतरराष्ट्रीय ब्लू फ्लैग बन गया। यह कार्यक्रम चार मुख्य मानदंडों—स्नान करने वाले जल की गुणवत्ता, पर्यावरण संबंधी शिक्षा एवं सूचना, पर्यावरण प्रबंधन, और समुद्र तटों पर रक्षण एवं सुरक्षा सेवाओं—के माध्यम से अलवणजल (मीठे पानी) तथा समुद्री क्षेत्रों में सतत विकास को बढ़ावा देता है। वर्तमान में लगभग पचास देश इस कार्यक्रम में भाग लेते हैं और 4,000 से अधिक समुद्र तटों, बंदरगाहों तथा नौकाओं के पास यह प्रमाणन है। विश्व में स्पेन में ब्लू फ्लैग लेबल वाले स्थलों की संख्या सबसे अधिक है।


ब्लू फ्लैग प्रमाणन चार मुख्य वर्गों—पर्यावरण संबंधी शिक्षा और सूचना; जल की गुणवत्ता; पर्यावरण प्रबंधन; सुरक्षा और सेवाओं के तहत निर्धारित 33 मानदंडों के अनुपालन पर आधारित हैं। पर्यावरण संबंधी शिक्षा और सूचना के अंतर्गत—मुख्य रूप से स्नान के पानी की गुणवत्ता, स्थानीय पारिस्थितिक तंत्र, पर्यावरणीय तत्वों, सांस्कृतिक स्थलों एवं समुद्र तट तथा उसके आसपास के क्षेत्रों के उपयोग को नियंत्रित करने वाले उपयुक्त कानूनों और/या विनियमों को दर्शाने वाली आचार संहिता के बारे में जानकारी प्रदर्शित की जानी चाहिए। जल की गुणवत्ता के अंतर्गत—समुद्र तटीय क्षेत्र को औद्योगिक, अपशिष्ट जल या सीवेज से संबंधित रिसाव से प्रभावित नहीं होना चाहिए; समुद्र तट को एस्चेरिचिया कोलाई (फेकल कोलाई बैक्टीरिया) और स्ट्रेप्टोकोकी के लिए सूक्ष्मजीवविज्ञानी पैरामीटर तथा प्राकृतिक मापदंडों हेतु ब्लू फ्लैग की अपेक्षाओं को पूरा करना चाहिए। इसके अलावा, पर्यावरण प्रबंधन के तहत—समुद्र तट साफ होना चाहिए; शैवाल वनस्पति या प्राकृतिक मलबे समुद्र तट से हटाए जाने चाहिए। समुद्र तट पर अपशिष्ट निपटान डिब्बे/कंटेनर पर्याप्त संख्या में उपलब्ध होने चाहिए और उन्हें नियमित रूप से बनाए रखा जाना चाहिए, पर्याप्त संख्या में शौचालयों या विश्राम कक्षों की सुविधाएं प्रदान की जानी चाहिए और समुद्र तट के आसपास के समुद्री तथा अलवणजल के संवेदनशील आवासों (जैसे प्रवाल भित्तियों या समुद्री घास की क्यारियों) की निगरानी की जानी चाहिए, जबकि सुरक्षा सेवा श्रेणी के तहत—सार्वजनिक सुरक्षा नियंत्रण के उपयुक्त उपायों को लागू करने; प्राथमिक चिकित्सा की सामग्री; पेयजल की आपूर्ति; प्रदूषण के खतरों से निपटने की तैयारी तथा विभिन्न उपयोगकर्ताओं और समुद्र तट के उपयोगों का प्रबंधन होना चाहिए ताकि आपसी संघर्षों एवं दुर्घटनाओं को रोका जा सके। लहराता हुआ ब्लू फ्लैग समुद्र तट के अच्छे स्वास्थ्य के लिए इन सख्त मानदंडों के 100 प्रतिशत अनुपालन का संकेतक होता है।

ब्लू फ्लैग प्रमाणन का महत्व

ब्लू फ्लैग से प्रमाणित समुद्र तटों को स्वच्छता, सुरक्षा, स्थिरता आदि के मामले में विश्व के सबसे अच्छे समुद्र तट में से एक माना जाता है। ब्लू फ्लैग प्रमाणन का स्थानीय समुदायों, व्यवसायों और सरकारों के लिए निम्न महत्व हैः l • प्रमाणित समुद्र तट की जानकारी अंतरराष्ट्रीय समुदाय तक पहुंचती है;

  • संवहनीय पर्यटन को आकर्षित करता है, जिससे आय एवं आजीविका में सुधार होता है;
  • प्राकृतिक और सांस्कृतिक विशेषताओं के बारे में लोगों की समझ बढ़ती है;
  • विशिष्ट प्राकृतिक और सांस्कृतिक परिसंपत्तियों का रक्षण एवं संरक्षण होता है; तथा
  • एक स्वस्थ एवं सुरक्षित वातावरण को बढ़ावा मिलता है।

भारत की पहल

भारत में ब्लू फ्लैग इंडिया कार्यक्रम वर्ष 2018 में शुरू किया गया, जिसके अंतर्गत संबद्ध हितधारक (स्थानीय सरकार—पंचायत, नगर परिषद, जिला प्रशासन, सरकारी एजेंसियां, तथा मंत्रालय) ब्लू फ्लैग के लिए आवेदन कर सकते हैं। प्रमाणन प्राप्त करने हेतु राष्ट्रीय परिचालक ‘ब्लू फ्लैग इंडिया’ को आवेदन भेजा जाता है। आतिथ्य उद्योग, कॉर्पोरेट संस्थान, समुदाय आदि स्थानीय सरकारों के साथ साझेदारी कर संवहनीय समुद्र तट प्रबंधन का समर्थन कर सकते हैं।

भारत ने तटीय क्षेत्रों के संवहनीय विकास हेतु जून 2018 में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर क्रमिक रूप से 13 तटीय राज्यों के तटों पर आई एम सेविंग माई बीच नामक सफाई अभियान शुरू किया गया। इसके बाद पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) ने भारत के तटीय क्षेत्रों में एनवायरनमेंट एंड एस्थेटिक्स मैनेजमेंट सर्विसेज (बीईएएमएस) नामक कार्यक्रम शुरू किया। यह भारत के तटीय क्षेत्रों के संवहनीय विकास के लिए मंत्रालय द्वारा आईसीजेडएम दृष्टिकोण के तहत शुरू की गई एक पहल है, जिसके मुख्य उद्देश्यों में समुद्र तट में प्रदूषण को कम करना; तटीय सुविधाओं के सतत विकास को बढ़ावा देना; प्राचीन तटीय पारिस्थितिक तंत्रों का रक्षण व संरक्षण करना; और स्थानीय अधिकारियों तथा हितधारकों को तटीय पर्यावरण और विनियमों के अनुसार समुद्र तटों पर स्वच्छता एवं सुरक्षा के उच्च मानकों को बनाए रखने हेतु तटों का उपयोग करने वालों (पर्यटकों) को कठोरता से निर्देशित करना शामिल है। जुलाई 2019 में एमओईएफसीसी ने पूरे देश में 13 समुद्री तटों को ब्लू फ्लैग प्रमाणन हेतु चिह्नित किया और इस उद्देश्य से तटीय विनियमन क्षेत्रों (सीआरजेड) में स्वीकृत गतिविधियों से संबंधित अधिसूचना जारी की।

बीईएएमएस कार्यक्रम की शुरुआत के बाद से अब तक 10 तटीय राज्यों में समुद्र तटों से 500 टन से अधिक ठोस अपशिष्ट का एकत्रीकरण, पुनर्नवीनीकरण और वैज्ञानिक रूप से निपटान के साथ-साथ समुद्र तटों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर की सफाई की गई है, जिससे समुद्री अपशिष्ट के जोखिम को 78 प्रतिशत से अधिक और समुद्री प्लास्टिक के जोखिम को 83 प्रतिशत से अधिक कम किया जा सका है। इन 10 समुद्र तटों के पर्यावरण प्रबंधन के लिए स्नान के पानी की गुणवत्ता (भौतिक, रासायनिक एवं जैविक प्रदूषण) और स्वास्थ्य जोखिम निगरानी का नियमित परीक्षण कर 3 वर्षों का डेटाबेस तैयार किया गया। इसके अलावा, समुद्र तट पर जाने वाले 1,25,000 लोगों को समुद्र तटों पर जिम्मेदार व्यवहार के लिए शिक्षित किया गया है।

चिंताएं

भारत की योजना कम से कम 100 समुद्री तटों को ब्लू फ्लैग प्रमाणन के अंतर्गत लाने की है, लेकिन इस योजना को गोवा जैसे प्रमुख तटीय पर्यटन राज्य में विरोध का सामना करना पड़ रहा है। जैसाकि गोवा के पारंपरिक मछुआरों का मानना है कि पश्चिमी देशों में न तो भारत की तरह प्राकृतिक समुद्र तट हैं और न ही वहां तट के किनारे रहने वाले पारंपरिक तटीय मछुआरे समुदाय हैं। ब्लू फ्लैग प्रमाणन के तहत समुद्र तटों को केवल 5-सितारा पर्यटकों के लिए प्रतिबंधित करना एक ऐसा कदम है, जो मछुआरों को तट से बाहर धकेल देगा और उन्हें समुद्र तट तक पहुंच से वंचित कर देगा। इसी प्रकार, ओडिशा के गंजम जिले, जहां सरकार पांच नए तटों को ब्लू फ्लैग के मानकों के अनुरूप विकसित करना चाहती है, में भी इसका विरोध किया जा रहा है, जैसाकि इस योजना से स्थानीय मछुआरों को अपनी आजीविका प्रभावित होने तथा पांरपरिक व्यवस्था के नष्ट होने की चिंता है।

निष्कर्ष

भारत में कुल 12 तटों को स्वच्छता, जल की गुणवत्ता और पर्यावरण प्रबंधन के लिए इस प्रमाणन का मिलना इस बात को दर्शाता है कि देश में पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता की दिशा में काम हो रहा है, और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा भविष्य में 100 समुद्री तटों को ब्लू फ्लैग प्रमाणन के अंतर्गत लाने की योजना से न केवल समुद्र तटों की सफाई होगी बल्कि इनके सौंदर्य मूल्य और पर्यटन संभावनाओं को भी बल मिलेगा। परंतु इसके बावजूद, भारत में समुद्र पर निर्भर करने वाले मछुआरों की चिंताओं का समाधान करना भी अत्यावश्यक है।

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