मार्च 2025 में म्यांमार के मांडले के निकट एक विनाशकारी भूकंप आया, जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 7.7 थी। केवल बारह मिनट बाद, भूकंप के आरंभिक अधिकेंद्र से लगभग 31 किमी. दक्षिण में 6.7 तीव्रता का दूसरा बड़ा भूकंप आया। दोनों भूकंपों के उद्गम स्थल, जो उथली भूमि वाले थे, लगभग 10 किमी. (6 मील) की गहराई में उत्पन्न हुए, और इसके बाद के दिनों में तेज आफ्टरशॉक (बड़े भूकंप के बाद आने वाले झटके) भी आए। इन भूकंपों से स्थानीय स्तर पर गंभीर क्षति हुई और इसके झटके 1,000 किमी. दूर बैंकॉक, थाईलैंड तक महसूस किए गए। नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) और यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) के उपग्रह डेटा के अनुसार, भूकंप के कारण सागाइंग भ्रंश (Sagaing Fault) के समानांतर धरातल में 6 मीटर (लगभग 20 फीट) से अधिक का विस्थापन हुआ।
सागाइंग भ्रंश एक प्रमुख नतिलंब सर्पण भ्रंश (strike-slip fault) है, जिसमें प्रत्येक वर्ष लगभग 20 मिमी. का पार्श्विक विस्थापन होता है और यह दक्षिण में अंडमान सागर से लेकर उत्तरी म्यांमार तक लगभग 700 किमी. तक फैला हुआ है। यह भ्रंश भारत और सुंडा प्लेटों के बीच होने वाली क्षेत्रीय प्लेट गति का लगभग 50–55 प्रतिशत वहन करता है। इसकी मध्य धारा में 1839 के विनाशकारी आवा भूकंप के बाद से कोई बड़ा संविदारण (rupture) नहीं हुआ था, जिसके कारण यह घटना लंबे समय से संचित विवर्तनिक दबाव (tectonic stress) की प्रत्याशित निर्मुक्ति के रूप में सामने आई।
सागाइंग भ्रंश संचलन, पैमाने और भूकंपीयता के संदर्भ में कैलिफोर्निया में स्थित सैन एंड्रियास भ्रंश के सदृश प्रतीत होता है।
भू-विरूपण और उपग्रह अवलोकन
नासा की जेट प्रपल्शन लेबोरेटरी (JPL), एडवांस्ड रैपिड इमेजिंग एंड एनालिसिस (ARIA) टीम और यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) ने रडार और ऑप्टिकल उपग्रह डेटा का प्रयोग करते हुए इंटरफेरोमेट्रिक सिंथेटिक अपर्चर रडार (InSAR) तकनीक के माध्यम से दोनों भूकंपों के दौरान धरातलीय संचलन का विश्लेषण किया। भूदृश्य में 3 मीटर (अर्थात 10 फीट) से अधिक के असाधारण विस्थापन देखे गए, जबकि भ्रंश के कुछ हिस्सों में 6 मीटर (लगभग 20 फीट) से भी अधिक विस्थापन दर्ज किया गया। मानचित्रित संविदारण लगभग 460 किमी. तक फैला था—जो इस तीव्रता वाले भूकंप के लिए सामान्यतः अपेक्षित संविदारण दूरी से लगभग दोगुना है। अधिकेंद्र के दक्षिण में स्थित बस्तियों में लगे सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से सतह के तीव्रता से खिसकने (rapid surface slip) के प्रत्यक्ष प्रमाण भी दर्ज किए गए।
सुपरशियर संविदारण गतिकी (Supershear Rupture Dynamics)
भूकंप सामान्यतः भ्रंश के किसी विशेष बिंदु से प्रारंभ होते हैं और ऊर्जा तरंगों (अर्थात भूकंपीय तरंगों) के रूप में तीव्रता से भ्रंश में फैलते हैं, ठीक वैसे ही जैसे जल निकाय में लहरें फैलती हैं। सामान्य परिस्थितियों में संविदारण प्रति सेकंड की गति से कुछ किमी. तक फैलते हैं, किंतु इस घटना में संविदारण की गति सामान्य से कहीं अधिक थी।
वैज्ञानिकों ने म्यांमार में आए दोहरे भूकंप का मुख्य कारण ‘सुपरशियर संविदारण’ को बताया है, जो एक दुर्लभ घटना है। इस प्रक्रिया में भूकंपीय ऊर्जा संविदारण से पहले ही सकेंद्रित हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप कंपन की तीव्रता असामान्य रूप से बढ़ जाती है और इस प्रकार विनाश तथा जनहानि में और अधिक वृद्धि होती है।
विस्तृत विश्लेषण से पुष्टि हुई कि संविदारण प्रारंभ में दक्षिण की ओर 5–6 किमी./सेकंड तक की सुपरशियर गति से प्रसारित हुआ। इसके बाद यह दिशा बदलकर उत्तर की ओर समान तीव्र गति से बढ़ा और फिर पुनः दक्षिण की ओर प्रसारित हो गया, जिससे एक विशिष्ट ‘बूमरैंग-सदृश’ (boomerang-like) संविदारण पैटर्न निर्मित हुआ। इस जटिल द्विपार्श्वीय प्रसार ने भूकंपीय ऊर्जा को आगे की दिशा में संकेंद्रित कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप समीपवर्ती भ्रंश क्षेत्र से कहीं अधिक दूर तक तीव्र और केंद्रित धरातलीय कंपन उत्पन्न हुआ—यह एक ऐसी घटना है जिसकी तुलना सुपरसोनिक विमान द्वारा उत्पन्न ध्वनि बूम (sonic boom) से की जा सकती है।
क्षेत्रीय विवर्तनिक
दक्षिण-पूर्व एशिया विवर्तनिक रूप से विश्व के सर्वाधिक सक्रिय क्षेत्रों में से एक है, जिसका निर्माण भारतीय और यूरेशियाई प्लेटों के बीच जारी तिर्यक अभिसरण (oblique convergence) से हुआ है। यह टकराव, जो लगभग 40-50 मिलियन वर्ष पहले शुरू हुआ था, भारतीय प्लेट को लगभग 5 सेमी. प्रति वर्ष की गति से उत्तर-पूर्व की दिशा में अग्रसर करता है, जिसके परिणामस्वरूप भ्रंशों का एक जटिल तंत्र और पर्वत-निर्माण की प्रक्रियाएं विकसित होती हैं।
इस निरंतर अभिसरण ने विश्व की कुछ सबसे प्रमुख भूवैज्ञानिक आकृतियों का निर्माण किया है, जिनमें हिमालय, शिलांग पठार, इंडो-बर्मन पर्वतमाला और अंडमान-निकोबार का गहन अंतःग्रसन क्षेत्र (सबडक्शन जोन—वह क्षेत्र, जहां एक प्लेट दूसरी प्लेट के नीचे धंसती है। यह अकसर अभिसारी प्लेट की सीमाओं पर होता है, जहां दो प्लेटें एक-दूसरे की ओर बढ़ती हैं) शामिल हैं।
इस विवर्तनिक विन्यास ने इतिहास के कुछ सबसे शक्तिशाली भूकंप उत्पन्न किए हैं, जैसे- 1792 का अराकान भूकंप (तीव्रता 8.5), जिसने बंगाल की खाड़ी में विनाशकारी सूनामी उत्पन्न की, और 2004 का हिंद महासागर में आया भूकंप (तीव्रता 9.2), जिसने तटीय क्षेत्रों में व्यापक तबाही मचाई। बार-बार आने वाले मध्यम से प्रबल भूकंप इस क्षेत्र में लगातार बनी रहने वाली भूकंपीय अस्थिरता को और स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।
मानवीय और संरचनात्मक प्रभाव
म्यांमार में आए सुपरशियर भूकंप के कारण आए तीव्र झटकों ने भूकंप के अधिकेंद्रों (epicentre) के आस-पास की इमारतों को भारी क्षति पहुंचाई। लगभग 28 लाख लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए। गौरतलब है कि यहां की अधिकांश आबादी लकड़ी से बने घरों में रहती है, जिनमें आपदा के समय मजबूती और स्थायित्व के लिए अतिरिक्त चिनाई (masonry) के कोई तत्व नहीं होते। ऐसे घर विशेष रूप से तीव्र भू-गति के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं।
इस आपदा में 5,400 से अधिक लोगों की मृत्यु हुई और 11,400 से ज़्यादा लोग घायल हुए। आसियान कोऑर्डिनेटिंग सेंटर फॉर हयुमैनिटेरियन असिस्टेन्स ऑन डिजास्टर मैनेजमेंट के अनुसार, 300 से अधिक अस्पताल और क्लीनिक; 2,500 विद्यालय; 55,000 घर; 95 पुल; और 400 सड़कें या तो बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं या पूरी तरह से नष्ट हो गईं। आर्थिक क्षति का आकलन 1.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर से लेकर 11 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक लगाया गया।
इसके अलावा, यूनाइटेड नेशंस सैटेलाइट सेंटर ने भी क्षति का आकलन किया और पाया कि भूकंप के अधिकेंद्र के पास स्थित मांडले शहर में 1,000 से अधिक इमारतें ढह गईं। इसके अतिरिक्त, 900 से अधिक इमारतों को भी भारी नुकसान पहुंचा।
इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस एंड रेड क्रीसेंट सोसाइटीज (IFRC) द्वारा लगभग 2,00,000 लोगों के व्यापक विस्थापन की जानकारी दी गई। इन लोगों के पास घर नहीं थे और वे सार्वजनिक स्थानों पर रह रहे थे। अगले कुछ हफ्तों में भूकंप के 468 से अधिक झटकों ने इस क्षेत्र को अस्त-व्यस्त कर दिया।
म्यांमार के बाहर भूकंप का प्रभाव
भूकंप का प्रभाव बैंकॉक तक फैला, जो कि संविदारण स्थल के दक्षिणी छोर से लगभग 670 किमी. दूर स्थित है। यद्यपि समग्र संरचनात्मक क्षति सीमित थी, तथापि एक 33 मंजिला निर्माणाधीन इमारत के ढह जाने से 63 लोगों की मौत हो गई।
एक उल्लेखनीय घटना तब देखी गई जब छत पर बने स्विमिंग पूलों से पानी बहने लगा। इस दोलन को भूकंपीय सरतल दोलन (Seismic Seiches) कहा जाता है। यह दीर्घ-अवधि की भूकंपीय तरंगों के कारण उत्पन्न होता है, जो ऊंची इमारतों और भूकंप के केंद्र से दूर स्थित जलाशयों में धीमी किंतु तीव्र गति पैदा करती हैं।
ऐसा संभव है कि बैंकॉक की नरम अवसादी मिट्टी ने भूकंप के दौरान धरातल के कंपन को और तीव्र कर दिया हो। लेकिन विशेषज्ञों को अभी भी यह पता लगाना है कि क्या बैंकॉक के भूकंप से प्रभावित होने का यह वास्तविक कारण था। इस निष्कर्ष तक पहुंचने में महीनों या यहां तक कि वर्षों का समय लग सकता है, क्योंकि इसके लिए इस क्षेत्र में लगाए गए भूकंपमापी यंत्रों (Seismometers) के परिणामों (विशेष तरंगों का रिकॉर्ड) का विस्तृत अध्ययन करना आवश्यक होगा।
दुर्भाग्यवश, म्यांमार में सीमित मात्रा में भूकंपीय रिकॉर्ड उपलब्ध हैं, और म्यांमार के दक्षिणी भाग (अंडमान सागर क्षेत्र) में कोई भूकंपमापी यंत्र मौजूद नहीं है।
सिंगापुर स्थित अर्थ ऑब्जर्वेटरी (नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी) के मुख्य अन्वेषक डॉ. शेंगजी वेई ने बताया कि विगत वर्षों में, कोविड-19 महामारी और तख्तापलट से जुड़ी रसद (लॉजिस्टिक) समस्याओं के कारण म्यांमार में वेधशाला के लगभग दो-तिहाई भूकंपीय मॉनिटर हटा दिए गए थे।
वेई ने आगे कहा कि संविदारित भ्रंश के आस-पास की तेज गति के आंकड़े एकत्र नहीं किए जा सके। वे इस क्षेत्र में भूकंपीय गतिविधियों, जैसे कई आफ्टरशॉक्स, का भी अध्ययन नहीं कर सके।
म्यांमार भूकंप के बाद, भारत ने मानवीय सहायता और आपदा राहत (Humanitarian Assistance and Disaster Relief-HADR) पहुंचाने के लिए ऑपरेशन ब्रह्मा शुरू किया, जिससे क्षेत्र में ‘प्रथम प्रत्युत्तरकर्ता’ (First Responder) के रूप में उसकी स्थिति और मजबूत हुई।
भारतीय नौसेना के जहाज सतपुड़ा, सावित्री, स्वदेशी मिसाइल कार्वेट कर्मुक और लैंडिंग क्राफ्ट यूटिलिटी (LCU) 52 (जो LCU MK-IV श्रेणी का दूसरा पोत है) द्वारा यांगून, म्यांमार में आवश्यक राहत सामग्री पहुंचाई गई।
निष्कर्ष
2025 में म्यांमार में आया भूकंप एक दुर्लभ और अत्यधिक विनाशकारी सुपरशियर संविदारण घटना का स्पष्ट उदाहरण हैं। इन घटनाओं ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे उच्च-जोखिम वाले क्षेत्रों में जनहानि और बुनियादी ढांचे की क्षति को कम करने के लिए उन्नत निगरानी और पूर्व चेतावनी प्रणालियां कितनी महत्वपूर्ण हैं।
भूकंप वैज्ञानिकों ने इस घटना को विश्व भर की अन्य प्रमुख भ्रंश प्रणालियों के लिए एक ‘चेतावनी’ कहा है। भवन निर्माण संहिता में सुधार, शहरी नियोजन नियमों का कड़ाई से पालन और क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय भूकंपीय तंत्र को मजबूत बनाने की आवश्यकता अब पहले से कहीं अधिक अनिवार्य हो गई है।
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