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पृथ्वी के प्राचीनतम ज्ञात शैल : नव्वुअगिट्टुक क्षेत्र

नव्वुअगिट्टुक ग्रीनस्टोन बेल्ट, कनाडा के उत्तरी क्यूबेक में हडसन खाड़ी के पूर्वी तट पर स्थित है। यह सुदूरवर्ती क्षेत्र, जो पारंपरिक इनुकजुआक आदिवासी समाज की भूमि का एक हिस्सा है, पिछले दो दशकों से वैज्ञानिकों की गहन रुचि का विषय बना हुआ है। इसके दूर तक फैले धूसर मैदानों के नीचे पृथ्वी की पर्पटी के सबसे प्राचीन ज्ञात अंश अवस्थित हैं, जो पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास की प्रारंभिक अवधि की एक अभूतपूर्व झलक प्रस्तुत करते हैं।

हालिया शोध से यह संकेत मिला है कि इस बेल्ट की चट्टानें लगभग 4.16 अरब वर्ष पुरानी हैं, जिससे स्पष्ट है कि ये हेडियन महाकल्प (Hadean eon) से संबद्ध हैं। 4.6 अरब वर्ष पहले शुरू हुआ यह महाकल्प अत्यधिक गर्मी, ज्वालामुखीय गतिविधि और एक बिल्कुल भिन्न प्रकार के भू-दृश्य के कारण प्रसिद्ध था, जो पृथ्वी के वर्तमान भू-दृश्य से बिल्कुल अलग था। अब तक प्राप्त, सबसे पुरानी स्थायी चट्टान संरचनाएं 4.3 अरब वर्ष प्राचीन थीं, जो उत्तर-पश्चिमी कनाडा के अकास्टा नीस कॉम्प्लेक्स में पाई गई थीं। नव-कालांकित नव्वुअगिट्टुक चट्टानें न केवल उन संरचनाओं की प्रतिस्पर्धी हैं, बल्कि उनसे भी अधिक प्राचीन हैं। यह शोध भू-विज्ञानी जोनाथन ओनील और उनकी टीम द्वारा किया गया था, और उनका यह शोध साइंस पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

पृथ्वी के इतिहास की खोज करना

पृथ्वी का गठन लगभग 4.5 अरब वर्ष पहले सौरमंडल की अव्यवस्थित उत्पत्ति के दौरान हुआ था। उस समय, यह ग्रह एक गलित पिंड था, जिस पर अकसर अंतरिक्षीय मलबा (space debris) गिरता रहता था और यह हानिकारक गैसों से घिरा रहता था। करोड़ों वर्षों के बाद जब पृथ्वी ठंडी होने लगी, तब एक ठोस भूपर्पटी और अंततः जल निकायों की रचना हुई।

वर्तमान में, पृथ्वी पर हेडियन महाकल्प से संबद्ध चट्टानें मिलना दुर्लभ है। अधिकांश आदिकालिक चट्टानें प्रायः विवर्तनिक गतिविधियों के कारण पिघल गई या नष्ट हो गई अथवा पुनर्चक्रित हो गई हैं, जिन्होंने भू-पृष्ठ को लगातार नया रूप दिया है। 4.16 अरब वर्ष या संभवतः उससे भी प्राचीन चट्टानों की खोज यह समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है कि प्रारंभिक भूपर्पटी की उत्पत्ति कैसे हुई और पृथ्वी गलित अवस्था से जीवन का समर्थन करने वाले ग्रह के रूप में कैसे परिवर्तित हुई।

विवादास्पद उत्पत्ति और वैज्ञानिक विमर्श

नव्वुअगिट्टुक ग्रीनस्टोन बेल्ट का काल निर्धारण 2000 के दशक के आरंभ से ही वैज्ञानिक विमर्श का विषय रहा है। भूविज्ञानी जोनाथन ओनील द्वारा सह-लिखित 2008 के एक अध्ययन में शुरू में यह प्रस्तावित किया गया था कि ये चट्टानें 4.3 अरब वर्ष प्राचीन थीं। हालांकि, उस अध्ययन में प्रयुक्त काल निर्धारण की पद्धतियों और आंकड़ों के निर्वचन को अन्य भूवैज्ञानिकों ने चुनौती दी थी, जिन्होंने सुझाव दिया था कि ये चट्टानें अत्यंत नई, संभवतः केवल 3.8 अरब वर्ष प्राचीन हो सकती हैं।

जरकन जैसे खनिजों की अनुपस्थिति में, जिनका प्रयोग सामान्यतया उनकी मजबूती और यूरेनियम की मात्रा के कारण रेडियोमीट्रिक डेटिंग (विकिरणमापीय काल निर्धारण) के लिए किया जाता है, नव्वुअगिट्टुक चट्टानों का काल निर्धारण करना एक बड़ी चुनौती थी। जरकन, जो अरबों वर्षों में हुई भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं का सामना करने की अपनी क्षमता के लिए जाने जाते हैं, चट्टानों में सिलिकॉन की कम मात्रा के कारण इस क्षेत्र में काफी हद तक नहीं पाए गए थे।

रेडियोमीट्रिक डेटिंग में सफलता

इस विवाद को हल करने के लिए, जोनाथन ओ’नील और उनकी टीम ने दुर्लभ मृदा तत्वों: सैमेरियम (Sm) और नियोडिमियम (Nd) का उपयोग करते हुए एक वैकल्पिक काल निर्धारण पद्धति का सहारा लिया। ये तत्व प्राचीन चट्टानों के काल निर्धारण के लिए विशेष रूप से उपयुक्त हैं जैसा कि ये मुख्यतः चार अरब वर्ष पहले रेडियोधर्मी थे और बाद की भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं से इनके प्रभावित होने की संभावना कम है।

इस तकनीक का प्रयोग करते हुए, शोधकर्ताओं ने मेटागैब्रोइक (मेटागैब्रो को एक ऐसे मध्यम-कणीय कायांतरित चट्टान के रूप में परिभाषित किया गया है जो गैब्रो से कायांतरित होती है) अंतर्वेधन कर, उन प्राचीन चट्टानों, जो बेल्ट के भीतर से नमूने के तौर पर ली गई थीं—का विश्लेषण किया। शोधकर्ताओं ने समैरियम के दो समस्थानिकों के अपक्षय को नियोडिमियम के दो अलग-अलग समस्थानिकों में मापा। काल निर्धारण की दोनों पद्धतियों से समान परिणाम, अर्थात 4.16 अरब वर्ष, प्राप्त हुए जिन्होंने इन निष्कर्षों को और अधिक विश्वसनीय बना दिया। इसके काल से यह संकेत मिलता है कि अंतर्वेधित की गईं चट्टानें हेडियन महाकल्प के दौरान बनी थीं और चूंकि ये चट्टानें प्राचीन ज्वालामुखीय चट्टानों के टूटने से बनी हैं, इसलिए ज्वालामुखी की वह संरचना और भी प्राचीन होनी चाहिए। यह अप्रत्यक्ष रूप से 2008 की उस मूल परिकल्पना का समर्थन करता है जिसके अनुसार बेल्ट के कुछ हिस्से 4.3 अरब वर्ष तक प्राचीन हो सकते हैं।

इस खोज का महत्व

यदि इन निष्कर्षों की पुष्टि हो जाती है, तो ये चट्टानें पृथ्वी पर हेडियन पर्पटी के एकमात्र ज्ञात जीवित अवशेष बन जाएंगी। इसके व्यापक निहितार्थ हैं। ये चट्टानें प्रारंभिक महासागरीय परिस्थितियों, प्रथम महाद्वीपीय पर्पटी के निर्माण और उस वातावरण की प्रकृति का पुनर्निर्माण करने में मदद कर सकती हैं, जहां से पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत हुई होगी। ऐसा माना जाता है कि इस क्षेत्र की कुछ चट्टानें सीधा प्राचीन समुद्री जल से निकले खनिजों से बनी हैं, जो प्रारंभिक पृथ्वी के महासागरों, तापमान और यहां तक कि जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियों के बनने के बारे में संभावित जानकारी प्रदान कर सकती हैं।

इसी क्षेत्र में नजदीकी अवसादी चट्टानों में भी सूक्ष्म जीवाश्म और रासायनिक संकेत मिल सकते हैं जो प्रारंभिक सूक्ष्मजैविक जीवन की ओर संकेत करते हैं। हालांकि, कालांकित मेटागैब्रो चट्टानों के बारे में यह नहीं माना जाता कि वे प्रावार (मेंटल) में उत्पन्न होने के कारण जीवन को आश्रय देने के लिए अनुकूल थीं, फिर भी ऐसी महत्वपूर्ण रचनाओं से इसकी सामीप्यता ने इस स्थल के महत्व को और अधिक बढ़ा दिया है।

वैज्ञानिक समुदाय द्वारा प्रतिक्रिया

हालांकि नया अध्ययन ठोस प्रमाण प्रस्तुत करता है, फिर भी सभी वैज्ञानिक नव्वुअगिट्टुक ग्रीनस्टोन बेल्ट को पृथ्वी की सबसे प्राचीन चट्टानों का संपूर्ण धारक घोषित करने के लिए तैयार नहीं हैं। भू-रसायनज्ञ बर्नार्ड बॉर्डन, जिन्होंने पहले इन चट्टानों के काल निर्धारण हेतु किए गए प्रारंभिक आकलनों की आलोचना की थी, ने स्वीकार किया कि नया शोध एक सुधार दर्शाता है। उन्होंने कहा कि काल निर्धारण की दोनों पद्धतियों की एकरूपता ने अध्ययन की विश्वसनीयता में वृद्धि की है, लेकिन उन्होंने अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले और अधिक गहनता से आंकड़ों का विश्लेषण करने की आवश्यकता पर बल दिया।

अन्य वैज्ञानिकों जैसे कि, पेन स्टेट यूनिवर्सिटी के जेसी रीमिंक ने अरबों वर्षों के भूवैज्ञानिक आंकड़ों के निर्वचन की जटिलता को स्वीकार किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि पृथ्वी के गतिशील भूवैज्ञानिक इतिहास को देखते हुए, 3.8 अरब वर्ष पुरानी चट्टानें भी स्वत: संरक्षित होने के कारण उल्लेखनीय हैं।

ऑस्ट्रेलिया के कर्टिन यूनिवर्सिटी के भूवैज्ञानिक ह्यूगो ओलिरूक ने संपूर्ण चट्टान के नमूनों, जिनमें कई खनिज अंतर्निहित हैं, के काल निर्धारण से संबद्ध स्वाभाविक जोखिमों पर प्रकाश डाला। उन्होंने चेतावनी दी कि एक भी खनिज में परिवर्तन इन चट्टानों के रेडियोमीट्रिक समय को पुनःसमायोजित और परिणामों को विषम कर सकता है। इसके बावजूद, उन्होंने नए आंकड़ों के महत्व और जारी वैज्ञानिक चर्चाओं में इसके संभावित योगदान को स्वीकार किया।

पर्यावरणीय चिंताएं

जहां वैज्ञानिक समुदाय इस खोज के निहितार्थों पर विचार कर रहा है, वहीं स्थानीय इनुइट समुदाय (आर्कटिक एवं उप-आर्कटिक क्षेत्र के मूल निवासी) ने इस स्थल के संरक्षण को लेकर चिंताएं व्यक्त की हैं। नव्वुअगिट्टुक ग्रीनस्टोन बेल्ट, पितुविक लैंडहोल्डिंग कॉर्पोरेशन द्वारा प्रबंधित भूमि पर स्थित है और स्थानीय नेताओं ने वैज्ञानिकों के दौरे के बाद इस स्थल को हुए नुकसान की सूचना दी है। कुछ मामलों में, चट्टानों को निकाला गया और यहां तक कि उन्हें ऑनलाइन बिक्री के लिए भी उपलब्ध कराया गया।

इसकी प्रतिक्रिया में समुदाय ने और नमूनों को एकत्र करने को अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया और वे एक प्रोविंशियल पार्क बनाने करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य भूमि का संरक्षण, और साथ ही भूमि को और अधिक नुकसान पहुंचाए बिना भविष्य में उत्तरदायी वैज्ञानिक शोध सुनिश्चित करना है।

हेडियन संसार

नव्वुअगिट्टुक ग्रीनस्टोन बेल्ट पृथ्वी के इतिहास के सबसे प्रारंभिक ज्ञात चरण की एक दुर्लभ और महत्वपूर्ण झलक प्रदान करता है। शोधकर्ताओं ने इन प्राचीन चट्टानों का काल 4.16 अरब वर्ष पूर्व निर्धारित किया है, और इस प्रकार उन्होंने पृथ्वी के प्रारंभिक काल के स्वरूप को और बेहतर ढंग से समझा है। ये निष्कर्ष पृथ्वी की प्रारंभिक महाद्वीपीय पर्पटी के निर्माण, प्रारंभिक महासागर की विशेषताओं और संभवतः उन वातावरणों पर प्रकाश डालते हैं जिनमें जीवन शुरू हुआ था।

हालांकि चट्टानों के सटीक काल और काल निर्धारण में प्रयुक्त तकनीकों की सटीकता के बारे में अभी भी कुछ प्रश्न अनुत्तरित हैं, फिर भी इस अध्ययन ने पृथ्वी की उत्पत्ति की पहेली में एक महत्वपूर्ण कड़ी जोड़ दी है। ये निष्कर्ष ब्रह्मांड में अन्यत्र ग्रहों के विकास की समझ को भी प्रभावित कर सकते हैं, क्योंकि ये निष्कर्ष यह दर्शाते हैं कि किसी ग्रह के निर्माण के बाद जीवन के लिए सहायक परिस्थितियां कितनी जल्दी विकसित हो सकती हैं।

जैसे-जैसे शोध जारी है और वैज्ञानिक समुदाय नए निष्कर्षों का मूल्यांकन कर रहा है, नव्वुअगिट्टुक ग्रीनस्टोन बेल्ट पृथ्वी के आरंभिक दिनों के रहस्यों को प्रकट करने हेतु महत्वपूर्ण है। यह प्राचीन स्थल, जो स्थानीय इनुइट लोगों द्वारा संरक्षित एवं सम्मानित है जिसका अध्ययन विश्व भर के वैज्ञानिकों द्वारा किया जा रहा है, पृथ्वी के विस्फोटक आरंभ और आज हम जिस निवास योग्य पृथ्वी पर रहते हैं, उसके बीच एक संपर्क स्थापित करने का काम करता है।

निष्कर्ष

निष्कर्षतः, हालांकि ये खोजें महत्वपूर्ण हैं, किंतु पिछले शोध अभियानों ने इस स्थल को कुछ नुकसान पहुंचाया है। इसलिए, इस स्थल की सुरक्षा के लिए एक प्रोविंशियल पार्क बनाने की मुहिम तेज हो रही है। स्थानीय लोगों ने कम से कम नुकसान के साथ वैज्ञानिक अध्ययन जारी रखने के लिए परमिट भी जारी किए हैं, क्योंकि नव्वुअगिट्टुक ग्रीनस्टोन बेल्ट के भूविज्ञान को पूरी तरह से समझने के लिए और अधिक शोध की आवश्यकता है।

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