दिल्ली में 25 मई, 2025 को एक तीव्र तूफान आया, जिसकी तीव्रता पवनों की प्रचंडता तथा असामान्य रडार इमेजरी (प्रतिबिंबकी) द्वारा चिह्नित की गई। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने उल्लिखित किया कि उसके रडार पर तूफान का स्वरूप अर्धचंद्राकार या तीरंदाज के धनुष के समान दिखाई दे रहा था। यह एक मौसम संबंधी घटना का संकेत है जिसे ‘बो एको’ कहा जाता है। तूफान के दौरान पवन की गति 100 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंच गई, जिससे पूरे क्षेत्र पर व्यापक प्रभाव पड़ा। इसके साथ ही रिकॉर्ड वर्षा भी हुई और मई 2025, दिल्ली में अब तक का सर्वाधिक वर्षा वाला महीना बन गया, जहां कुल मिलाकर 186 मिमी. से अधिक और एक ही दिन में 80 मिमी. से अधिक वर्षा हुई, जिसके कारण यातायात और शहरी जीवन अस्त-व्यस्त हो गया।
बो एको क्या है
बो एको, प्रचंड पवन-संचालित तूफानी वाताग्रों से संबद्ध मेसोस्केल कनवेक्टिव सिस्टम (एमसीएस—तड़ित झंझाओं का समूह जो एक प्रणाली या सिस्टम की भांति कार्य करता है) का विशिष्ट रडार चिह्नक है। डॉप्लर रडार इमेजरी पर, यह तड़ित झंझाओं की झुकी हुई या धनुषाकार रेखा के समान प्रतीत होता है। इन एको (echoes) का नाम उस विशिष्ट आकृति के कारण रखा गया है, जहां इस प्रणाली के पीछे चलने वाली तीव्र पवनों द्वारा तूफान के मार्ग के केंद्र को बाहर की ओर धकेल दिया जाता है, जिससे एक तीरंदाज के धनुष जैसी आकृति बन जाती है।
‘बो एको’ पद का प्रयोग पहली बार 1970 में एक जापानी अमेरिकन मौसम विज्ञानी, टेड फुजिता द्वारा किया गया था। टेड फुजिता को टॉरनेडो (Tornadoes) को वर्गीकृत करने हेतु फुजिता स्केल (एफ-स्केल) विकसित करने के लिए भी जाना जाता है। बो एको वास्तव में तूफानों का एक क्रम होता है, जिसे शीत वाताग्र (squall line) भी कहा जाता है, जो कभी-कभी बड़े शीत वाताग्र में अंतर्निहित हो सकता है। एक बो एको 20 से 100 किमी. तक के क्षेत्र में फैल सकता है और सामान्यतया इसका प्रभाव 3 से 6 घंटे तक रह सकता है। ये प्रायः मौसम संबंधी घटनाओं के पूर्वसूचक होते हैं, जिनमें सीधी रेखा में चलने वाली विनाशकारी पवनें, अधोवलन प्रस्फोट (Downburst) और कुछ मामलों में, क्षणिक टॉरनेडो शामिल हैं।
बो एको कैसे बनता है
बो एको, नमोष्ण पृष्ठीय वायु और तड़ित झंझा से नीचे आने वाली अत्यंत ठंडी वर्षा-शीतित वायु संहतियों के बीच होने वाली जटिल अंतःक्रिया के कारण बनता है। यह अंतःक्रिया तब शुरू होती है जब वर्षा-शीतित वायु का अधोप्रवाह (Downdraft) होता है और भूमि पर पहुंचकर वह क्षैतिज रूप से प्रसारित होती है। यह शीतल एवं सघन वायु एक ऐसा घेरा बनाती है जो इसे ऊष्ण तथा सतह पर मौजूद अधिक उत्प्लावी वायु, जिसे गस्ट फ्रंट (निर्घात वाताग्र) कहा जाता है, से पृथक करती है।
निर्घात वाताग्र, नमोष्ण सतही वायु को वायुमंडल में ऊपर की ओर धकेलता है जो नए तड़ित झंझा सेल (तड़ित झंझा सेल, जिसकी अवधि 30 से 60 मिनट तक की होती है, किसी तड़ित झंझा का आधार होता है) के विकास को उत्प्रेरित करती है। ये नए सेल अधोप्रवाह में वृद्धि करते तथा निर्घात वाताग्र की तीव्रता को बनाए रखते हुए और अधिक वर्षा उत्पन्न करते हैं। जैसे-जैसे यह चक्र चलता रहता है, तूफान के पीछे वायु का एक पश्च अंर्तवाह विकसित होता है, जो तूफान की रेखा के केंद्र को आगे की ओर धकेलता है और एक विशिष्ट ‘बो’ अर्थात धनुष की प्रतिकृति बनाता है। बो के सिरे पर प्रति-घूर्णी भ्रमिल (बुकएंड वोर्टिसेज—सामान्यतया बढ़े हुए अधोप्रवाह क्षेत्र और सतह पर प्रचंड पवनों की बढ़ी हुई संभावनाओं को दर्शाते हैं), या आवर्ती भ्रमिल (वोर्टिसेज) भी विकसित हो सकते हैं और कभी-कभी अल्पावधि के टॉरनेडो भी उत्पन्न कर सकते हैं।
समय के साथ, तड़ित झंझा समूह अर्ध-स्थिर अवस्था में पहुंच सकता है जहां तूफान के नए सेल, बो के वाताग्र पर विकसित होते रहते हैं जबकि पुराने सेल पीछे समाप्त होते रहते हैं। निरंतर होने वाले पुनरुद्भवन और प्रबलन तीव्र पवनों को बनाए रखने में मदद करते हैं, जिससे प्रायः सतह पर व्यापक क्षति होती है।
बो एको प्रणाली के प्रकार
बो एको प्रणालियों को उनकी संरचना एवं प्रकृति के आधार पर मुख्य रूप से दो प्रतिरूपों में वर्गीकृत किया जा सकता हैः
(i) प्रगामी प्रतिरूपः इस प्रतिरूप में बो एको अपेक्षाकृत अल्पावधि वाला और तेजी से, सामान्यतया वातावरण में मौजूद वायु की दिशा से लंबवत, आगे बढ़ने वाला होता है। अकसर ऐसे बो एको ग्रीष्म ऋतु में उत्पन्न होते हैं और अत्यधिक अस्थिर प्रकृति वाले होते हैं। ये सामान्यतया एक संकीर्ण मार्ग में तीव्र एवं सघन अधोवलन प्रस्फोट के परिणामस्वरूप उत्पन्न होते हैं।
(ii) क्रमिक प्रतिरूपः क्रमिक बो एको, व्यापक और लगभग वातावरण में मौजूद वायु के समानांतर संरेखित होते हैं। ये प्रायः शीत ऋतु में उत्पन्न होते हैं और अनेक अंतर्निर्मित झुके हुए भागों एवं लाइन एको वेव पैटर्न (LEWP) को सम्मिलित कर सकते हैं।
ये अविरत विनाशकारी पवनों और संभावित क्षणिक टॉरनेडो से संबद्ध होते हैं, विशेष रूप से तब, जब इनमें उच्च वर्षण वाले सुपरसेल की विशेषता (मेसोवोर्टिसेज) मौजूद होती है।
एलईडब्ल्यूपी एक मौसम रडार विन्यास है जिसमें तड़ित झंझाओं की कोई रेखा किसी मध्य माप के निम्न-दाब वाले क्षेत्र में दक्षिण में या अभिभूमध्यरेखा (भूमध्यरेखा की ओर) में आवर्ती ‘शीर्ष’ के साथ बने एकाधिक बो एको प्रदर्शित करती है।
अधोवलन प्रस्फोटः सह-परिघटना
अधोवलन प्रस्फोट एक प्रचंड तथा स्थानीय वायवीय घटना है जो तड़ित झंझा या वर्षा करने वाले मेघ द्वारा बनी शीतित वायु के अवरोही भाग के कारण होती है। ये परिघटनाएं तब उत्पन्न होती हैं जब एक कपासी मेघ (Cumulus Cloud) प्रकार का मेघ अपने भीतर धारित जल के भारी द्रव्यमान का वहन और अधिक समय तक नहीं कर पाता। जब भार अत्यधिक बढ़ जाता है, तो जल तेजी से भूमि की ओर गिरता है, और नीचे गिरते समय उसकी गति और अधिक बढ़ जाती है।
जैसे-जैसे वर्षण का यह द्रव्यमान नीचे की ओर गिरता है, यह नीचे की वायु को विस्थापित कर देता है, जिससे एक तेज अधोप्रवाह बनता है। जब यह वायु भूमि से टकराती है, तो यह सभी दिशाओं में फैल जाती है, जिसके परिणामस्वरूप सतह पर विनाशकारी सीधी रेखा वाली पवनें बहती हैं। कुछ स्थितियों में, तूफान के भीतर मौजूद शुष्क वायु इस प्रक्रिया को बढ़ा देती है। गिरती हुई वर्षा आंशिक या पूरी तरह से शुष्क वायु में वाष्पित हो जाती है, जिससे यह और अधिक शीतल हो जाती है तथा इसका घनत्व बढ़ जाता है। यह सघन वायु नीचे की ओर गति करती है, जिससे अधोवलन प्रस्फोट और भी तीव्र हो जाता है।
अधोवलन प्रस्फोट को सामान्यतया बो एको और अन्य संवहनीय प्रणालियों में देखा जाता है, और ये उसी प्रकार वायु की व्यापक क्षति के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं, जिस प्रकार टॉरनेडो द्वारा वायु की क्षति की जाती है। हालांकि इसका वायु प्रतिरूप, घूर्णी के बजाय रैखिक होता है।
बो एको और डेरेचो के मध्य संबंध
यद्यपि सभी डेरेचो (Derechos), बो एको होते हैं, लेकिन सभी बो एको डेरेचो नहीं बनते हैं। (डेरेचो, एक विशेष प्रकार का दीर्घकालिक व्यापक तूफान है जिसे विशिष्ट मानदंड को पूरा करने के कारण यह नाम दिया गया है।) किसी तूफान को डेरेचो के रूप में चिह्नित करने हेतु उसमें निम्न विशेषताएं होनी चाहिएः
- पवन से हुई क्षति का दायरा, कम से कम 400 मील होना चाहिए;
- इस प्रकार के तूफान का विस्तार कम से कम 60 मील तक होना चाहिए;
- इसकी अवधि में पवन की गति की प्रचंडता कम से कम 58 मील प्रति घंटा होनी चाहिए; और
- एकाधिक झोंकों की गति 75 मील प्रति घंटे से अधिक होनी चाहिए।
डेरेचो सामान्यतया एक या एक से अधिक बो एको, प्रायः बड़े क्वासी-लीनियर कनवेक्टिव सिस्टम (QLCS), से उत्पन्न होते हैं। QLCS एक सामान्य झंझाओं की संरचना है जो शीत वाताग्र या अन्य झुके हुए रेखाखंडों से निकलती हैं, और वायु के कारण अकस्मात उत्पन्न होने वाले जोखिम के गंभीर संकट के लिए इनका सावधानीपूर्वक निरीक्षण किया जाता है।
झंझाओं से संबद्ध गंभीर पवनों की प्रमुख परिघटना
झंझावात, वर्षा एवं तड़ित के अलावा वायु की प्रबल तथा संकटदायी घटनाएं उत्पन्न करने में सक्षम होते हैं जिसे पैमाने, अवधि और तीव्रता के मानदंड पर अलग-अलग दर्ज किया जा सकता है।
निम्न तालिका में संवहनी तूफानों से संबद्ध गंभीर पवन के प्रमुख प्रकारों का संक्षिप्त सारांश दिया गया हैः
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प्रकार |
परिभाषा |
माप (स्केल) |
अवधि |
सामान्य पवन गतिकी |
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माइक्रोबर्स्ट |
सामान्य, किंतु अत्यंत तीव्र प्रकार का डाउनबर्स्ट (< 4 किमी. के दायरे में) |
अत्यंत स्थानिक |
कुछ मिनटों (सामान्यतया < 10 मिनट) |
~100 मीटर प्रति घंटे तक (160 किमी./घंटा) या उससे अधिक |
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डाउनबर्स्ट |
एक प्रबल, स्थानीय अधोप्रवाह जो सतह से टकराता है और बाहर की ओर प्रवाहित होता है |
स्थानीय (~10 किमी. तक) |
कुछ मिनटों से लेकर 30 मिनट तक |
100 मीटर प्रति घंटे (160 किमी./घंटा) से अधिक हो सकता है |
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बो एको |
शीत वाताग्र का रडार संकेत जो बाहर की ओर झुका हुआ होता है, तेज हवा का संकेत देता है |
मध्य मापक्रम वाले (10 से 100 किमी. तक) |
कई घंटों तक |
60-100 मीटर प्रति घंटा (95-160 किमी./घंटा) |
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डेरेचो |
तीव्र गति से प्रवाहित संवहनीय प्रणाली के कारण दीर्घकालिक व्यापक तूफान |
क्षेत्रीय (क्षतिग्रस्त स्थान >400 किमी.) |
>6 घंटे, प्रायः 12 घंटे या उससे अधिक |
> 58 मीटर प्रति घंटा (93 किमी./घंटा), प्रायः इससे अधिक (स्थानीय स्तर पर 100 मीटर प्रति घंटे से अधिक हो सकता है |
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निर्घात वाताग्र (गस्ट फ्रंट) |
झंझा के अधोप्रवाह से प्रसारित वर्षा-शीतित वायु की प्रमुख धारा |
स्थानीय से मध्य मापक्रम (किमी. दस के गुणज में) |
कम अवधि से मध्यम अवधि वाले (मिनटों से 1-2 घंटों तक) |
सामान्यतया 30-60 मीटर प्रति घंटा (50-95 किमी./घंटा), हालांकि कभी-कभी प्रचंड |
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हबूब |
शुष्क क्षेत्रों में तड़ित झंझा की बर्हिवाही पवनों से उत्पन्न बड़ी आंधी |
क्षेत्रीय (10 से लेकर सैकड़ों किमी. तक का दायरा हो सकता है) |
30 मिनट से लेकर कुछ घंटों तक |
30-60 मीटर प्रति घंटा (50-95 किमी./घंटा), हालांकि प्रचंड निर्घात संभव हैं |
बो एको के स्वरूप और रडार विशेषताएं
बो एको से संबद्ध रडार परावर्तकता के पैटर्न (प्रतिरूप) मौसम विज्ञानियों के लिए संभावित नुकसान का पूर्वानुमान लगाने में सहायक होते हैं। तूफान के बनने के आरंभिक चरण में एक प्रबल अधोवलन प्रस्फोट से परावर्तक पैटर्न का उभार शुरू हो सकता है, जिससे तूफान धनुषाकार जैसा दिखता है।
तूफान की सर्वाधिक तीव्रता में परावर्तकता का एक सुस्पष्ट झुकाव दिखाई देता है, जो अत्यधिक संवहन एवं ऊर्ध्वाधर उद्वाह (vertical updraft) के क्षेत्रों को उजागर करती है।
तूफान की सर्वाधिक तीव्रता के पश्चात, रडार प्रायः रियर इनफ्लो नॉचेज (RINs) [आरआईएन कमजोर परावर्तकता का चैनल है जो बो के क्रोड के काफी पीछे स्थित होता है] या वीक एको चैनल (WECs) को प्रदर्शित करता है। ये झंझा प्रणाली में पवन के प्रचंड प्रवाह के संकेतक हैं। ये अकसर रियर-इनफ्लो जेट (RIJ) से संबद्ध होते हैं। आरआईजे, एक तेज गति से गतिमान मध्य-क्षोभमंडलीय वायु की एक धारा है, जो बो एको के बाद अवरोही होती है और यह उच्च सतही वायु की गति में योगदान देती है।
इसके अलावा, मिड-एल्टिट्यूड रेडियल कंवर्जन्स (MARC) संकेतक, लगभग 3-7 किमी. की ऊंचाई पर स्टॉर्म-रिलेटिव वेलोसिटी मैप (SRM) के डेटा में स्पष्ट हो सकता है। MARC में सतह के बीच प्रचंड वायु की गति की भिन्नता शामिल होती है, जो संभावित अधोवलन प्रस्फोट और वाताग्र की क्षति का संकेत देता है।
मौसमी और पर्यावरणीय परिस्थितियां
बो एको का उभार तूफान से पूर्व की वायुमंडलीय परिस्थितियों से प्रभावित होता है। तूफान से पूर्व ये परिस्थितियां गर्म और ठंडी ऋतुओं के बीच अत्यंत भिन्न होती हैं।
गर्म या ग्रीष्मकालीन परिस्थितियां: ग्रीष्म ऋतु के महीनों में, बो एको अकसर अपेक्षाकृत सामान्य पैमाने/स्तर पर कमजोर दबाव में किंतु अत्यधिक अस्थिरता के समय बनते हैं, जहां:
- सतह के विशेष पैटर्न के कारण अग्रभाग के पास एकत्रित ओस बिंदु के कारण पूर्व-पश्चिम में तापमान अधिक होता हैं।
- उत्पत्ति क्षेत्र के निकट सतह का तीव्र अभिसरण और संभावित तापमान (थीटा-ई) का मान अधिकतम तापमान के बराबर होता है।
- उत्पत्ति क्षेत्र के निकट मध्य स्तरों (850 और 700 मिलिबार) पर मध्यम से तीव्र तप्त संचलन (स्थूल द्रव की क्षैतिज गति, जैसे वायु या महासागरीय धारा) होता है।
- शुष्क वायु के माध्यम से सतह के पास उच्च उन्नतांश पर अत्यधिक नमी की मात्रा (700 और 500 मिलिबार) मौजूद हो सकती है, जो हानिकारक पवनों की गति को तीव्र कर सकती है।
ऊष्मागतिकी, ये प्रणालियां अकसर कंवेक्टिव अवेलेबल पोटेंशियल एनर्जी (CAPE—सवंहनीय उपलब्ध स्थितिज ऊर्जा), वायुमंडल में ऊपर की ओर वायु के संचलन को बढ़ाने की क्षमता का मापदंड जो उस बादल और तूफान के गठन को प्रभावित कर सकता है जिसका मान 2400 से 6000 जूल/किग्रा. तक होता है, के कारण अत्यधिक अस्थिर/अस्थायी वायु संहतियों में परिवर्तित हो जाती हैं। निम्न वायुमंडल, 2.5 किमी. तक के उन्नतांश तक, में वायु का अपसरण गति के संदर्भ में सामान्यतया प्रबल, परंतु दिशा की स्थिति में सीमित होता है।
शीतल या शीत ऋतु/वसंतकालीन स्थितियां: इसके विपरीत, शीत ऋतु के महीनों में बो एको अत्यधिक गतिशील बल द्वारा संचालित होते हैं, जहां:
- प्रगामी निम्न-दाब प्रणालियों से संबद्ध तप्त एवं शीतल वाताग्र हावी होते हैं।
- समस्त वायुमंडल में मध्यम से प्रचंड वायु क्षेत्रों की व्यापकता होती है।
- आकाश में ऊंचाई से पवन गति का विस्थापन, विशेषकर निम्न-स्तरीय व्युत्क्रमण, नीचे की ओर हो सकता है।
- अस्थिरता कम होती है (CAPE का मान 500 से 2000 जूल/किग्रा.), लेकिन पवन का तीव्र अभिसरण इसकी पूर्ति कर देता है।
शीत ऋतु में बो एको प्रायः शीत वाताग्रों के साथ या उनसे पहले बनते हैं और लंबे शीत वाताग्रों में अंतर्निहित हो सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप सामान्यतया वायु की अधिक संगठित एवं व्यापक क्षति होती है।
भारत में, मानसून-पूर्व महीनों (अप्रैल-जून) के दौरान बो एको के बनने की संभावना अधिक होती है, जब उच्च सतही तापन और नमी की विषमता तड़ित झंझा के लिए आदर्श परिस्थितियां बनाती है।
बो एको के भीतर टॉरनेडो
यद्यपि, बो एको मुख्य रूप से अपनी सीधी रेखा वाली पवनों के लिए जाने जाते हैं, तथापि इनमें अंतर्निहित मेसोवोर्टेक्स (पवन का एक प्रचंड भंवर, या चक्रवाती परिसंचरण, जिसका दायरा 10-100 मील अर्थात 16-161 किमी. होता है) के कारण अग्रभाग अल्पकालिक टॉरनेडो उत्पन्न करते हैं जो विशेषकर बो के शीर्ष या उत्तरी भाग के पास उत्पन्न होते हैं।
मेसोवोर्टेक्स की उत्पत्ति वर्धित निम्न-स्तरीय अभिसरण और चक्रवाती अपरूपण से होती है। उद्वाह क्षेत्रों में तीव्र ऊर्ध्वाधर विस्तारण इन भंवरों को गहन बनाता है जो EF0 से EF2 बवंडर उत्पन्न करने के लिए पर्याप्त शक्तिशाली हो सकते हैं।
भारत में बो एको की घटनाएं
हालांकि बो एको की घटनाओं का अध्ययन सामान्यतया यूनाइटेड स्टेट्स एवं यूरोप में किया जाता है, लेकिन ये भारत के लिए भी असामान्य नहीं हैं। उदाहरण के लिएः
- 31 मई, 2022 को दिल्ली और नोएडा के ऊपर बो एको बना था जहां पवन की गति 100 किमी. प्रति घंटा थी। हालांकि, यह घटना अल्पकालिक थी, लगभग एक घंटे तक, लेकिन इससे उल्लेखनीय क्षति हुई।
- मई 2025 में, दिल्ली में एक और बो एको द्वारा उत्प्रेरित तूफान आया, जिसमें भारी वर्षा के साथ समान रूप से 100 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं, और शहर में अत्यधिक व्यवधान भी उत्पन्न हुआ।
- मई 2025 में ओडिशा में हुई तड़ित झंझा के दौरान इसी प्रकार के स्वरूप का अवलोकन किया गया, जिसने भारत के मानसून और मानसून-पूर्व की जलवायु में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति की संभावना को स्पष्ट किया।
आईएमडी के वैज्ञानिकों के अनुसार, बो एको की ये घटनाएं अकसर मौसमी परिवर्तनों के दौरान तीव्र तड़ित झंझा की रफ्तार से मिलती हैं और मौसम पर इनका महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।
निष्कर्ष
बो एको प्रबल और दृष्टिगत रूप से विशिष्ट रडार घटनाएं हैं जो व्यापक रूप से वायुजनित क्षति पहुंचाने में सक्षम प्रचंड तड़ित झंझा की उपस्थिति का संकेत देती हैं, और यह संगठित संवहन का सबसे प्रभावशाली रूप प्रदर्शित करती हैं। हालांकि, सामान्यतया इन्हें समशीतोष्ण जलवायु में देखा जाता है, लेकिन दिल्ली और भारत के अन्य क्षेत्रों में घटित हाल की घटनाएं भारतीय मौसम विज्ञान में इनकी बढ़ती प्रासंगिकता को चिह्नांकित करती हैं।
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