मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के भूवैज्ञानिकों ने ग्रीनलैंड में 3.7 अरब वर्ष पूर्व के शैलों की खोज की है, जिनमें पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के सबसे प्राचीन ज्ञात साक्ष्य मौजूद हैं। भूवैज्ञानिकों के इस अध्ययन का शीर्षक—पॉसिबल एओरचेयन रिकॉर्ड्स ऑफ द जियोमैग्नेटिक फील्ड प्रिजर्व्ड इन द इसुआ सुप्रक्रस्टल बेल्ट, सदर्न वेस्ट ग्रीनलैंड है। इस अध्ययन को जर्नल ऑफ जियोफिजिकल रिसर्च: सॉलिड अर्थ में प्रकाशित किया गया है। इस अध्ययन के निष्कर्ष, पृथ्वी पर चुंबकीय क्षेत्र के ज्ञात अस्तित्व के पिछले अनुमान, 3.5 अरब वर्षों, से और 200 मिलियन वर्ष पीछे ले जाते हैं।
भूवैज्ञानिक संकेत और काल निर्धारण
वैज्ञानिकों की टीम ने लौह एवं सिलिका-समृद्ध परतों से संघटित लौह संरचनाओं का विश्लेषण किया, जो संभवतः वायुमंडलीय ऑक्सीजन के स्तर में हुई उल्लेखनीय वृद्धि से पहले प्राचीन समुद्र में संचित हुई थीं। उन्होंने खनिजों के काल निर्धारण की पुष्टि हेतु यूरेनियम-लेड रेशियो पद्धति [रेडियोमेट्रिक डेटिंग की एक तकनीक, जिसके द्वारा लेड (सीसा) के स्थिर समस्थानिकों में यूरेनियम के रेडियोधर्मी समस्थानिकों के क्षरण का मापन कर चट्टानों का काल या आयु निर्धारित की जाती है] का प्रयोग किया। इससे वैज्ञानिकों को प्रारंभिक जीवन का समर्थन करने में पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के समय एवं महत्व को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिली।
इसुआ सुप्रक्रस्टल बेल्ट के उत्तरपूर्वी क्षेत्र में दो महत्वपूर्ण कायांतरी (मेटामॉर्फिक) घटनाएं—लगभग 3.69 अरब वर्ष पूर्व और 2.85 अरब वर्ष पूर्व— हुई थीं और साथ ही लगभग 1.5 अरब वर्ष पूर्व एक उष्णजलीय (हाइड्रोथर्मल) परिवर्तन भी हुआ था। प्रारंभिक कायांतरी घटना के दौरान, संघटित लौह संरचना में एक अस्थायी रासायनिक चुंबकत्व विकसित हुआ। उल्लेखनीय रूप से, यह चुंबकीय चिह्न पश्चातवर्ती भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं में पूर्ण रूप से नष्ट नहीं हुआ।
पुराचुंबकीय डेटा संकेत देते हैं कि इसुआ सुप्रक्रस्टल बेल्ट ने इओआर्कियन भूचुंबकीय क्षेत्र के साक्ष्यों को बरकरार रखा है, जो पृथ्वी के प्रारंभिक चुंबकीय इतिहास के संबंध में बहुमूल्य जानकारी प्रदान करते हैं।
पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का महत्व
पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के बिना पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं होता। यह ब्रह्मांडीय विकिरण और सूर्य द्वारा उत्सर्जित आवेशित कणों, जिन्हें सौरपवन कहते हैं, के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण रक्षाकवच या रक्षी के रूप में कार्य करता है। इसके महत्व के बावजूद, अब तक पृथ्वी के इतिहास में आधुनिक चुंबकीय क्षेत्र के पहली बार प्रकट होने की सटीक तिथि अनिश्चित बनी हुई है।
पिछले 16 करोड़ वर्षों में पृथ्वी के चुंबकीय ध्रुव सैकड़ों बार उलटे या ‘पलटे’ (ध्रुवों में परिवर्तन) हैं। सबसे नया और बड़ा परिवर्तन, जिसे माटुयामा-ब्रुन्हेस (एम-बी) भू-चुंबकीय परिवर्तन के रूप में जाना जाता है, लगभग 780,000 वर्ष पहले हुआ था।
प्राचीन शैलों में चुंबकीय चिह्न
वैज्ञानिकों ने ग्रीनलैंड के इसुआ में लौह-समृद्ध शैलों की एक प्राचीन शृंखला का विश्लेषण किया। इन चट्टानों के भीतर पाए जाने लौह कण सूक्ष्म चुंबकों की भांति क्रिया करते हैं जो उनके गठन के समय पर पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र केवल और दिशा को रिकॉर्ड करने में सक्षम हैं। क्रिस्टलीकरण के दौरान ये कण अपने स्थान पर स्थिर हो जाते हैं, जिससे चुंबकीय चिह्न संरक्षित रहते हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि ग्रीनलैंड की इन 3.7 अरब वर्ष प्राचीन चट्टानों में वर्तमान चुंबकीय क्षेत्र, जिसका माप लगभग 30 माइक्रोटेस्ला (यह चुंबकीय प्रवाह घनत्व की एक इकाई है जो टेस्ला (टी) के दस लाखवें हिस्से के बराबर होती है) है, की तुलना में—15 माइक्रोटेस्ला के चुंबकीय क्षेत्र का बल संरक्षित था। यह खोज पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के प्रारंभिक बल को दर्शाती है जो पूरे चट्टान के नमूनों से प्राप्त की गई थी। इस प्रकार के नमूने, पहले के अध्ययनों, जो विशेष क्रिस्टल पर केंद्रित थे, की तुलना में अधिक स्थिर और विश्वसनीय डेटासेट प्रदान करते हैं।
अध्ययन का महत्व
वायुमंडलीय विकास के बारे में नए संकेत: इस खोज के परिणाम पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र और उसके वायुमंडल के विकास के बीच एक संभावित संबंध को और अधिक स्पष्ट करते हैं। 2.5 अरब वर्ष से भी पहले वायुमंडल से एक निष्क्रिय और भारी गैस, जेनॉन (Xenon) का लुप्त होना, एक चिरकालिक रहस्य है। जैसा कि जेनॉन अभिक्रियाशील नहीं है और अपेक्षाकृत भारी होता है, इसलिए इसे अंतरिक्ष में निर्मुक्त नहीं होना चाहिए था। एक नई परिकल्पना, जिस पर अभी शोध चल रहा है, यह संकेत देती है कि आवेशित जेनॉन के अणु चुंबकीय क्षेत्र के साथ अंतःक्रिया के माध्यम से दूर हो गए होंगे।
पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की विकसित होती परिरक्षण शक्ति: यद्यपि पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की समग्र शक्ति समय के साथ अपेक्षाकृत स्थिर प्रतीत होती है, तथापि यह ज्ञात हुआ है कि अतीत में सौरपवन में अत्यधिक तीव्रता थी। इससे ज्ञात होता है कि समय के साथ भूपृष्ठ की संरक्षा करने हेतु चुंबकीय क्षेत्र की प्रभावशीलता में वृद्धि है संभवतः इस वर्धित सुरक्षा ने प्रारंभिक जीवन को महासागरों से निकलकर महाद्वीपों पर आने का अवसर दिया होगा।
पृथ्वी के डायनेमो की उत्पत्ति और उसका संरक्षण: पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र बाह्य क्रोड में गलित लोहे की गति से उत्पन्न होता है, जो आंतरिक क्रोड के क्रमिक रूप से ठोस होने से उत्पन्न उत्प्लावी बलों द्वारा उत्प्रेरित होता है, जिससे डायनेमो बनता है। हालांकि, पृथ्वी के प्रारंभिक निर्माण के दौरान, आंतरिक क्रोड तब तक ठोस नहीं हो पाया था। इससे यह महत्वपूर्ण प्रश्न उठता है कि प्रारंभिक चुंबकीय क्षेत्र कैसे बना रहा। नए खोजों से संकेत मिलता है कि पृथ्वी के प्रारंभिक डायनेमो को बल प्रदान करने वाली प्रणाली वर्तमान पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को उत्पन्न करने वाली पिंडन की प्रक्रिया जितनी ही प्रभावी रही होगी।
पृथ्वी के आंतरिक भाग की जांच: समय के साथ पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता में होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन यह जानने के लिए भी आवश्यक है कि पृथ्वी के ठोस आंतरिक क्रोड का निर्माण कब शुरू हुआ। उस समय को समझने से पृथ्वी के गहन आंतरिक भाग से ऊष्मा के उत्सर्जन की दर, जो प्लेट विवर्तनिकी जैसी प्रक्रियाओं को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, के बारे में बहुमूल्य जानकारी मिल सकती है।
इसुआ सुप्रक्रस्टल बेल्ट का भूवैज्ञानिक महत्व
पृथ्वी पर स्थित कई चट्टानों का इतिहास मिश्रित और लंबा रहा है, जिससे उनके मूल चुंबकीय रिकॉर्ड अस्पष्ट हो गए हैं। हालांकि, ग्रीनलैंड में स्थित इसुआ सुप्रक्रस्टल बेल्ट एक विशिष्ट भूविज्ञान प्रदर्शित करता है। यह क्षेत्र स्थूल महाद्वीपीय पर्पटी के ऊपर स्थित है, जिसने इसे विवर्तनिक गतिविधि और विरूपण से काफी हद तक परिरक्षित किया है। परिणामस्वरूप, शोधकर्ता 3.7 अरब वर्ष पूर्व चुंबकीय क्षेत्र के अस्तित्व का समर्थन करने वाले ठोस प्रमाण प्रस्तुत करने में सक्षम हुए।
अध्ययन के सहयोगी लेखक, एमआईटी के प्रोफेसर बेंजामिन वीस ने टिप्पणी की कि इसुआ के उत्तरी भाग में पृथ्वी की सबसे प्राचीन और भली-भांति संरक्षित चट्टानें हैं। 3.7 अरब वर्ष पूर्ण अपनी उत्पत्ति के बाद से इन चट्टानों में कोई विशिष्ट ताप महसूस नहीं किया गया और ग्रीनलैंड की बर्फ की चादर ने इन्हें आधुनिक संदूषण से संरक्षित रखा है, जिससे ये पृथ्वी की प्रारंभिक स्थितियों के अध्ययन के लिए आदर्श हैं।
अनुसंधान की भावी दिशा
भविष्य की ओर देखते हुए, शोधकर्ताओं का लक्ष्य कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में अन्य प्राचीन शैल संरचनाओं की खोज करना है। ये अध्ययन लगभग 2.5 अरब वर्ष पहले वायुमंडल में ऑक्सीजन के निर्मुक्त होने से पूर्व पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की प्रकृति को और स्पष्ट करने का प्रयास करते हैं। पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के प्रारंभिक बल और परिवर्तनशीलता के बारे में हमारी समझ में सुधार कर, वैज्ञानिक यह निर्धारित करने की आशा करते हैं कि क्या चुंबकीय क्षेत्र ग्रहों की सतहों पर जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं और वे दीर्घकालिक वायुमंडलीय विकास को कैसे प्रभावित करते हैं?
© Spectrum Books Pvt Ltd.



