पूर्वी गंग वंश ने लगभग ग्यारहवीं से पंद्रहवीं शताब्दी के मध्य तक उड़ीसा और उत्तरी आंध्र प्रदेश के एक विस्तृत भू-भाग पर शासन किया। उड़ीसा साम्राज्य को अनंतवर्मन चोड गंग (1076-1148) ने प्रसिद्धि दिलाई। वह एक महान विजेता होने के साथ-साथ कला एवं साहित्य का भी संरक्षक था; उसी के द्वारा पुरी के प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर का निर्माण करवाया गया था। उसके उत्तराधिकारी भी योग्य शासक सिद्ध हुए, जिन्होंने निरंतर होने वाले तुर्क आक्रमणों को विफल किया, किंतु 1359-60 ईसवी में फिरोज शाह तुगलक ने राज्य पर आक्रमण कर दिया। 1434 ईसवी में कपिलेंद्र (1434-1470) द्वारा स्थापित नए वंश (सूर्यवंश) ने गंग वंश को अपदस्थ कर सत्ता पर अपना अधिकार स्थापित कर लिया। इनकी उपाधि गजपति थी। 1542 ईसवी में सूर्यवंशी गजपतियों के पतनोपरांत गोविंद द्वारा स्थापित भोई वंश सत्तासीन हुआ। इस राजवंश ने 1559 ईसवी तक शासन किया, लेकिन मुकुंद हरिचंदन ने इसका तख्तापलट कर दिया। हरिचंदन की मृत्यु के पश्चात, 1588 ईसवी में सुलेमान द्वारा बंगाल में उड़ीसा का विलय कर लिया गया।

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