औपनिवेशिक भारत में नए शहरी केंद्रों का विकास ब्रिटिश राजनीतिक, सैन्य एवं वाणिज्यिक हितों से गहराई से संबद्ध था। कलकत्ता, बॉम्बे और मद्रास जैसे नगरों का पत्तन-राजधानियों तथा प्रशासनिक केंद्रों के रूप में विस्तार हुआ, जबकि दिल्ली, लाहौर और बैंगलोर जैसे पारंपरिक भारतीय नगरों के समानांतर छावनियों और सिविल लाइन्स जैसी पृथक बस्तियों का विकास हुआ। ये शहरी केंद्र स्वदेशी नगरीय आवश्यकताओं की तुलना में औपनिवेशिक शासन की प्राथमिकताओं और सामरिक हितों को अधिक दर्शाते थे।
ब्रिटिश नगर नियोजन (आयोजन) ने स्वच्छता, सुव्यवस्था और नियंत्रण की यूरोपीय अवधारणाओं पर आधारित नवीन विशेषताओं को आरंभ किया। चौड़ी सड़कें, अपवाह प्रणालियां, सुदृढ़ीकृत क्षेत्र और स्मारकीय सार्वजनिक भवन औपनिवेशिक स्थापत्य के अनिवार्य घटक गए। हालांकि इन सुधारों का क्रियान्वयन अत्यंत विभेदकारी एवं असमान रहा। सुनियोजित 'व्हाइट टाउन' (White Towns), सैन्य छावनियों और सिविल लाइन्स को उत्कृष्ट नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं, जबकि भारतीयों के निवास वाले सघन 'अश्वेत नगर' (Black Towns) निरंतर उपेक्षा, अत्यधिक भीड़ और निम्नस्तरीय स्वच्छता की समस्याओं से ग्रस्त रहे। इस प्रकार, औपनिवेशिक स्थापत्य नस्लीय विभेद और सामाजिक पदानुक्रम का एक प्रत्यक्ष प्रतीक बन गया।
औपनिवेशिक शासन के अंतर्गत नगरीय समाज जटिल और क्रमिक रूप से विकासशील था। जहां प्रारंभिक शहरों में स्पष्ट पृथक्करण दिखाई देता था, वहीं समय के साथ ऐसे उपनगर उभरकर आए जहां संपन्न भारतीय और यूरोपीय एक-दूसरे के निकट रहने लगे। भारतीय व्यापारियों और अभिजात वर्ग ने, विशेष रूप से बॉम्बे जैसे केंद्रों में, नगरपालिका की राजनीति में अपना प्रभाव स्थापित किया तथा एक साझा सार्वजनिक क्षेत्र के सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके विपरीत, शहरी आबादी का बहुसंख्यक हिस्सा—औद्योगिक श्रमिक एवं प्रवासी—असुरक्षित और दयनीय परिस्थितियों में जीवन यापन करने के लिए विवश था।
तीव्र जनसंख्या वृद्धि, औद्योगीकरण तथा प्लेग जैसी महामारियों के प्रसार ने नगरीय समस्याओं को और अधिक जटिल बना दिया। यद्यपि नगर सुधार न्यासों का गठन जमाव या ट्रैफिक और स्वच्छता संबंधी चुनौतियों के निराकरण हेतु किया गया था, तथापि किफायती आवास उपलब्ध कराए बिना मलिन बस्तियों को गिरा देने से परिस्थितियां और अधिक विकट हो गईं। फलतः, औपनिवेशिक नगर-नियोजन अपने पीछे स्थापत्य कला की भव्यता के साथ-साथ गहन सामाजिक एवं स्थानिक असमानताओं की एक मिश्रित विरासत छोड़ गया।



